Home अमर भारती एक्सक्लूसिव इंतजार की घड़ियां हुई ख़त्म, पर्यटकों के लिये खुल गया कतर्नियां वन्य जीव विहार का द्वार

इंतजार की घड़ियां हुई ख़त्म, पर्यटकों के लिये खुल गया कतर्नियां वन्य जीव विहार का द्वार

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राजीव शर्मा, बहराइच। जिस घड़ी का इंतजार दूर देश के सैलानी पिछले 5 माह से लगातार कर रहे थे अब उस घड़ी का वनवास खत्म होने का वक्त एकदम मुहाने पर आ गया है। सीमावर्ती जिले बहराइच की वादियों में स्थित वर्ल्ड फेम कतर्नियां वन्य जीव विहार का कपाट दूर-दूर से आने वाले तमाम सैलानियों के आवागमन के लिये 5 माह के लंबे अंतराल के बाद एक बार फिर 15 नंवबर की तारीख से पर्यटकों के पर्यटन के लिए खुलने जा रहा है।

हिमालय की तलहटी में बसे तराई के जिले बहराइच में लगभग 551 वर्ग किमी क्षेत्रफल के दायरे में फैले कतर्नियां जंगल की मनमोहक वादियों में सैलानियों के लिए तमाम दुर्लभ किश्म के जंगली जानवरों, बाघ, तेंदुओं के कुनबों से आबाद इलाका जहां सैलानियों को आकर्षित करते हैं ,वहीं कुलांचे भरते हजारों हिरनों के झुंड के साथ ही जंगल क्षेत्र से निकलने वाली विकराल गेरुआ नदी में उछल कूद करते हुए जंप मारती गैंजाइटिक डॉल्फिन, सर्द मौषम में नदी की रेत पर धूप सेंकते लंबे चौंड़े घड़ियालों का झुण्ड सैलानियों के आकर्षण का केंद्र काफी अर्से से बनें हुए हैं।

इस इलाके में जगह-जगह फैले शाल के पेड़ों से आच्छादित कतर्नियां के घने जंगल का अस्तित्व का नाता हजारों वर्ष पुराना है, मगर सेंचुरी के साथ इसे वन्यजीव विहार का दर्जा वर्ष 1976 को मिला था। वन विभाग की स्थापना 1865 में हुई थी। सैकड़ों वर्ग किमी क्षेत्रफल में फैले कतर्नियां का खास आकर्षण और रोमांच जंगल के राजा को नजदीक से देखने का है। हाथियों की सवारी के जरिए गैंडों को देखने का भी एक खासा रोमांच है। इस बार कतर्नियां प्रशासन ने सैलानियों को ठहरने और जंगल में घूमने के लिए पहले से भी बढि़या इंतजाम किया है।

यहां बाघ के अलावा आपको नजर आएंगे तेंदुआ, हाथी, बारह सिंघा, डॉल्फिन, मगरमच्छ, चीतल, सांभर, कांकड़, घड़ियाल, जंगली सुअर, नीलगाय, बंदर समेत सैकड़ों दुर्लभ वन्यजीव। अब तक पक्षियों में क्रेन समेत विदेशी मेहमान भी यहां पहुंच चुके हैं। अत्यंत दुर्लभ बंगाल फ्लोरकिन का कुनबा भी रहस्यमय ढंग से अपना दीदार कराने के लिए तैयार है। डीएफओ जीपी सिंह कहते हैं कि सैलानियों के विहार के लिए इस बार कतर्नियां जंगल में पहले की अपेक्षा और भी बेहतर व्यवस्था का बंदोबस्त किया गया है।

कतर्नियां जंगल में स्थित दुर्लभ जानवरों और परिंदों की बात करें तो यहाँ आकर्षण का केंद्र बने वन्य जीवों की तादात में  30 बाघ, 70 तेंदुआ, 1500 बारह सिंघा, 200 मगरमच्छ, 6000 हिरन, 300 घड़ियाल, 70 डॉल्फिन, दो पालतू हाथी, 4000 लंगूर, 200 से अधिक कांकड़, 13 हजार से अधिक पक्षी, 7000 से अधिक बंदर, 2000 से अधिक नीलगाय, जंगली सुअर 7000, तीन गैंडों का कुनबा जगह जगह कुलांचे भरता कभी भी खुली आँखों से देखा जा सकता है।

पर्यटकों के लिये ठहरने की व्यवस्था : कतर्नियां इलाके में स्थित मोतीपुर, मुर्तिहा, ककरहा, कतर्निया, निशानगाड़ा सहित कई जगहों पर ईकोसिस्टम से लैश अत्याधुनिक संशाधन से सुसज्जित गेस्ट हाउस व थारूहट को रंग रोगन कर आगन्तुक मेहमानों के लिये वन विभाग की तरफ से तैयार कराया गया है जहाँ पर्यटक पूरे परिवार के साथ ठहर कर जंगल की वादियों का लुत्फ़ 15 नवम्बर से उठा सकते हैं।

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कतर्नियां की सैर पर आने के लिए लखनऊ या दूसरे शहरों से बसों के जरिए बहराइच पहुंच सकते हैं। बहराइच से वन क्षेत्रों के लिए निजी वाहनों के साथ-साथ टैक्सी भी कतर्नियां जंगल तक जाती है। बहराइच मुख्यालय से इसकी दूरी लगभग 110 किमी है। ट्रेन द्वारा जाने पर बिछिया स्टेशन उतरकर जाने पर दूरी चार किमी है। सड़क मार्ग से दिल्ली से 500 किमी व लखनऊ से 240 किमी पर स्थित है। निकटतम हवाई अड्डा नेपाल में नेपालगंज है।

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