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ब्रह्मोस के बाद भी भारत के पास हैं ये बेहद खतरनाक मिसाइल, दुनिया मानती है लोहा

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Written And Edited by: कुमार संतोष

नई दिल्ली। ब्रह्मोस के सुखोई के साथ सफल परीक्षण के बाद भारत दुनिया का एकलौता देश है जिसको तीनों स्थानों जल, थल और वायु में क्रूज मिसाइल की मारक क्षमता हासिल है। इस परीक्षण के बाद भारत के सितारे बुलंद हैं। सुखोई से ब्रह्मोस को दागने के बाद पड़ोसियों में खलबली मच गई है। चीन और पाकिस्तान ने इस परीक्षण के बाद चिंता जाहिर की है। हालांकि भारत के पास ब्रह्मोस के बाद भी कई हथियार हैं जिसका लोहा पूरा विश्व मानता है। यहां पर हम सिर्फ मिसाइल क्षमता की बात करेंगे। अन्य क्षमताओं के मिला दें तो पाकिस्तान कहीं भी भारत के मुकाबले नहीं ठहरता है। वहीं चीन भी कई मामलों में भारत से पीछे हो जाता है। अब चीन भी भारत की ताकत को समझने लगा है।

अग्नि मिसाइल- अग्नि रेंज की मिसाइल क्षमता में भारत के पास अग्नि के कुल पांच संस्करण अभी मौजूद हैं। अग्नि -1 का वजन 12 टन और लंबाई 15 मीटर है। इसकी मारक क्षमता है 700 से लेकर 1200 किलोमीटर तक। अग्नि -1 मिसाइल में विशेष नौवहन प्रणाली लगी है जो निशाने पर स्टीकता से वार करती है। वहीं अग्नि -2 की मारक क्षमता है 2000- 2500 किलोमीटर। इस मिसाइल के परीक्षण के समय चीन और पाकिस्तान की नींद उड़ गई थी। इसकी मारक क्षमता के अंदर दोनों देशों के कई महत्वपूर्ण शहर आते हैं।

अग्नि-3 को जुलाई 2006 लॉन्च किया गया था और इसकी कुल लंबाई है 17 मीटर। इस मिसाइल की मारक क्षमता 3500 किलोमीटर है। साथ ही अग्नि-3 न्यूक्लीयर क्षमता से लैस है और विश्व में अपनी तरह का सबसे घातक हथियार है। अग्नि-4 का परीक्षण 2011 में किया गया था। इस मिसाइल का वजन 17000 किलोग्राम है और लंबाई 20 मीटर है। इसका निर्माण मुख्य रूप से अग्नि-2 और अग्नि-3 के पूरक के रूप में की गई थी।

अब बारी आती है अग्नि सीरिज के अग्नि-5 मिसाइल की। अग्नि-5 मिसाइल भारत का पहला इंटर-कॉन्टिनेन्टल बैलिस्टिक मिसाइल है। इस मिसाइल का वजन 50,000 किलोग्राम है। इस मिसाइल का आधिकारिक रेंज 5000 किलोमीटर है। हालांकि चीन ने इस मिसाइल की रेंज 7000-9000 किलोमीटर होने की बात कही थी। इस मिसाइल के परीक्षण के वक्त चीन इतना डर गया था कि उसने यूएन में भारत पर प्रतिबंध लगाने की वकालत की थी। साथ भारत को लंबी दूरी की मिसाइल बनाने से रोकने का भी अनुरोध किया था।

नाग मिसाइल- इस मिसाइल को 1990 में लॉन्च किया गया था। मिसाइल का वजन 42 किलोग्राम है और लंबाई 1.90 मीटर है। इसे टैंक भेदी मिसाइल का दर्जा प्राप्त है। यह मिसाइल भारत का पांचवा स्वदेशी तकनीक से लैस मिसाइल है। इस मिसाइल से किसी भी मौसम में फायर किया जा सकता है।

शौर्य मिसाइल- यह मिसाइल सामरिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण मिसाइल है। इसकी मारक क्षमता 750 से 1900 किलोमीटर तक है। यह भारत की पहली हाइपर सोनिक मिसाइल है। इसका परीक्षण 2008 में किया गया था।

पृथ्वी- भारत के मिसाइल प्रोग्राम के अंतर्गत निर्माण किया जाने वाला पहला मिसाइल था पृथ्वी। परमाणु संपन्न तथा 150-350 किमी की रेंज तक सतह से सतह पर मार करने वाला यह मिसाइल सेना के तीनों अंगों का अभिन्न हिस्सा है।

आकाश मिसाइल- यह भारत का वो हथियार है जिससे दुश्मन देशों के पसीने छूट जाते हैं। इसका परीक्षण 1990 में किया गया था। वजन 720 किलोग्राम है। इसकी लंबाई 5.78 मीटर है। भारत की इस मिसाइल को खरीदने के लिए कई देश लाइन में हैं। यह मिसाइल एक साथ 8 अलग-अलग लक्ष्यों को भेदने में सक्षम है। युद्ध के मैदान में ब्रह्मोस के बाद यह मिसाइल युद्ध परिणाम को बदलने की क्षमता रखता है। इस मिसाइल का तोड़ फिलहाल किसी देश के पास नहीं है।

धनुष- धनुष मिसाइल स्वदेशी तकनीक से निर्मित पृथ्वी प्रक्षेपास्त्र का नौसैनिक संस्करण है। यह प्रक्षेपास्त परमाणु हथियारों को ले जाने की क्षमता रखता है। प्रक्षेपण के समय इसका वजन 4600 किलोग्राम होता है।

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ब्रह्मोस मिसाइल- अब बारी आती है उस मिसाइल की जो दुनिया में अभी तक उपलब्ध मिसाइलों सबसे घातक और विनाशक है। ब्रह्मोस दुनिया का अकेला सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है। इसकी रफ्तार ध्वनि की गति से तीन गुणा अधिक है। यह एक न्यूक्लियर मिसाइल है जिसकी मारक क्षमता 290 किलोमीटर है। इसका परीक्षण 2001 में किया गया था। इस मिसाइल का इस्तेमाल सेना के तीनों अंगों द्वारा किया जाता है। इसे डीआरडीओ ने रूस के साथ मिलकर विकसित किया है। इसकी लंबाई 8.4 मीटर है। इस मिसाइल की रफ्तार अमेरिका सबसोनिक तोमाहावक क्रूज मिसाइल के तीन गुना अधिक है।

इस मिसाइल की एक खासियत यह भी है कि यदि मिसाइल छोड़े जाने के बाद लक्ष्य अगर अपना रास्ता बदल लेती है तो मिसाइल भी अपना रास्ता बदलकर लक्ष्य को भेद कर ही दम लेती है। एक बार लक्ष्य पर निशाना साधने के बाद उसे बचाना नामुश्किल है। इस मिसाइल सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसको दुनिया का कोई भी शक्तिशाली और अत्याधुनिक रडार सिस्टम पकड़ने में सक्षम नहीं है। यह मिसाइल मात्र 10 मीटर की ऊंचाई पर तेज गति से उड़ान भरती है। दुनिया का कोई भी घातक हथियार इसे नष्ट करने में सक्षम नहीं है। भारत बह्मोस के ब्रह्मोस-2 और ब्रह्मोस-3 मिसाइल पर भी काम कर रहा है।

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