Home राज्य उत्तर प्रदेश-उत्तराखण्ड योगी सरकार में विभागी लापरवाही देख खफा हुए प्रो कठेरिया, एक साल में अनुसूचित जाति के विकास पर नहीं खर्च हो पाया 4732 करोड़

योगी सरकार में विभागी लापरवाही देख खफा हुए प्रो कठेरिया, एक साल में अनुसूचित जाति के विकास पर नहीं खर्च हो पाया 4732 करोड़

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में अधिकारियों की लापरवाही के चलते पिछले एक वर्ष के अंदर अनुसूचित जाति के विकास का 4732 करोड़ रुपया खर्च नहीं हो सका है। राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष प्रो राम शंकर कठेरिया ने इस पैसे को दलितों के विकास के लिए तत्काल उपयोग में लाने हेतु प्रदेश के मुख्य सचिव को निर्देशित किया है। प्रो कठेरिया ने बताया कि उप्र में अनुसूचित जाति के विकास के लिए पिछले वर्ष हजारों करोड़ रुपये का बजट में प्राविधान किया गया था। इसमें से 4732 करोड़ रुपए 10 विभागों द्वारा इस्तेमाल ही नहीं किये गये।

उन्होंने बताया कि सबसे ज्यादा लापरवाही लोक निर्माण विभाग में हुई, जहां 1354 करोड़ रुपए की धनराशि अभी भी खर्च नहीं हो सकी है। इसके बाद ग्राम्य विकास विभाग में 1166 करोड़ और बिजली विभाग में 337 करोड़ रुपए अधिकारियों द्वारा अभी तक इस्तेमाल नहीं किये गये हैं। प्रो कठेरिया ने बताया कि ये आकड़े एक समीक्षा बैठक के दौरान मिले हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश के मुख्य सचिव राजीव कुमार को इन पैसों के सदुपयोग के लिए निर्देशित किया गया है। आयोग के अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि प्रदेश की पूर्ववर्ती सपा और बसपा सरकारें अनुसूचित जाति के विकास का कार्य ही नहीं करती थीं। राज्य में जबसे योगी सरकार आयी है, इस दिशा में प्रगति हुई है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आश्वासन दिया है कि दो माह के अंदर इस मद के बकाये पैसे का सदुपयोग होगा और वह स्वयं मई माह में इसकी समीक्षा करेंगे।

गौरतलब है कि पत्रकार वार्ता से पहले राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के पदाधिकारियों ने प्रदेश के मुख्य सचिव और विभिन्न विभागों के प्रमुख सचिवों के साथ समीक्षा बैठक की। इस बैठक में आयोग के उपाध्यक्ष एल मुरुगन, संयुक्त सचिव डा स्मिता एस चैधरी और निदेशक कन्हैया लाल भी मौजूद रहे। समीक्षा के दौरान आयोग के अध्यक्ष प्रो कठेरिया ने प्रदेश के सरकारी विभागों की लापरवाही पर सख्त नाराजगी जतायी। उन्होंने मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि सभी विभागों को पत्र जारी कर और उन्हें निर्देश दें कि अनुसूचित जाति के कल्याण के लिए वह अपने विभाग के कार्यक्रमों और परियोजनाओं की विस्तृत योजना बनाकर जो बजट जिस मद में आवंटित किया गया है, उसे उसी मद में खर्च करें।

उन्होंने ने बताया कि अनुसूचित जाति के लोगों के उत्पीड़न के मामलों की समीक्षा में पता चला कि तमाम ऐसे मामले हैं, जिनमें समय सीमा बीत जाने के बाद भी आरोप पत्र दाखिल नहीं किये गये। उन्होंने कहा कि अधिकारियों की इस लापरवाही के चलते पीड़ितों को समय से मुआवजा भी नहीं मिल पा रहा है। आयोग के अध्यक्ष ने कहा कि हत्या और रेप जैसे जघन्य अपराधों में मामलों में इस तरह की शिथिलता बरतने वाले अधिकारियों को चिन्हित कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जायेगी। उन्होंने बताया कि आयोग के पास तमापम ऐसी शिकायतें आयी हैं कि सीवर की सफाई करने के दौरान जिन मजदूरों की मौत हो जाती है, उन्हें मुआवजा नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने कहा कि आयोग इन मामलों की गंभीरता से छानबीन कर रहा है।

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