Home राज्य उत्तर प्रदेश-उत्तराखण्ड गोरखपुर महोत्सव भारतीय संस्कृति, सभ्यता और आस्था का प्रतीक है – धर्मपाल सिंह

गोरखपुर महोत्सव भारतीय संस्कृति, सभ्यता और आस्था का प्रतीक है – धर्मपाल सिंह

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मुकेश कुमार, गोरखपुर। गोरखपुर महोत्सव 2018 का शुभारम्भ प्रदेश के सिंचाई एंव सिंचाई यान्त्रिक मंत्री धर्मपाल सिंह ने दीप प्रज्वलित करके किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि गोरखपुर महोत्सव भारतीय संस्कृति सभ्यता और आस्था का प्रतीक है। देश की दौलत यहां की धरती है जिसमें गंगा, यमुना, गोदावरी, राप्ती, गोमती प्रवाहित होती है। इसके बल पर हमारे देश की सभ्यता और संस्कृति विकसित होती है।

उन्होंने कहा कि गोरखपुर में नाथ सम्प्रदाय की सिद्धपीठ है इसके द्वारा गुरू गोरखनाथ, योगी दिग्विजयनाथ, अवैद्यनाथ जैसे सिद्ध महापुरूष दिये गये है। वर्तमान में यहां से योगी आदित्यनाथ प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में प्रदेश को नित्य नये नये विकास कार्य संचालित कर रहे है। इसका प्रकटीकरण गोरखपुर महोत्सव में भी दिखाई दे रहा है। इस अवसर पर महोत्सव समिति के ओर से उन्हें स्मृति चिन्ह भेंट किया गया। इस अवसर पर नवल्स, स्टेपिंग स्टोन, सेन्ट्रल एकेडमी तथा आर.पीएम. स्कूल की 400 छात्र छात्राओं द्वारा देश की रंग बिरंगी झांकी प्रस्तुत की गयी। 40-40 के ग्रुप में बच्चों ने उत्तर प्रदेश, पंजाब, उड़ीसा, बंगाल, गुजरात, असम एंव अन्य प्रदेश की गीत नृत्य की झांकी प्रस्तुत किया।

महोत्सव आयोजन समति के अध्यक्ष मण्डलायुक्त अनिल कुमार ने सभी का स्वागत किया। उन्होंने बताया कि महोत्सव के आयोजन का उद्देश्य गोरखपुर के साथ साथ पूर्वान्चल की संस्कृति एंव सभ्यता को प्रदर्शित करना है तथा विभिन्न क्षेत्रों में हो रहे नित्त नये-नये विकास को दर्शाना है। जिलाधिकारी राजीव रौतेला ने सभी आगंतुकों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। इस मौके पर राज्य मंत्री, पशुधन, मत्स्य, राज्य सम्पत्ति जय प्रकाश निषाद, विधायक डा0 राधामोहन दास अग्रवाल, महेन्द्रपाल सिंह, कमलेश पासवान, देवरिया के विधायक कमलेश शुक्ल, आई.जी. मोहित अग्रवाल, डीआइजी निलाब्जा चैधरी, कुलपति प्रो0 वी.के. सिंह तथा गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

उल्लेखनीय है कि गोरखपुर महोत्सव का उद्घाटन प्रदेश के राज्यपाल राम नाइक द्वारा किया जाना था परन्तु खराब मौसम के कारण वे न आ सके। उन्होंने फोन पर ही महोत्सव को सम्बोधित किया तथा मकर संक्रान्ति की शुभकामनाएं दिया। अपने सम्बोधन में उन्होंने महोत्सव में न आ पाने पर खेद व्यक्त किया और विश्वास व्यक्त किया कि यह आयोजन पूर्ण सफल होगा। उन्होंने कहा कि उ0प्र0 में ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में गोरखपुर का विशिष्ट स्थान है, क्योंकि यहां गुरू गोरखनाथ की सिद्धपीठ है। पूरे विश्व में उ0प्र0 का विशेष स्थान है क्योंकि इससे बड़े केवल 3 देश अमेरिका, चीन और इण्डोनेशिया हैं।

उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति एंव सभ्यता में गुरू गोरखनाथ पीठ का विशेष योगदान है। यहां से कई योगी संत, महात्मा ने जन्म लिया और समाज की सेवा में सर्वस्व न्यौछावर कर दिया है। उसी परम्परा को आगे बढ़ाते हुए वर्तमान में योगी आदित्यनाथ समाज एवं देश की सेवा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कला, साहित्य एवं संस्कृति के क्षेत्र में कई विभूतियों ने गोरखपुर का नाम रौशन किया है। इस श्रृंखला में उन्होंने रघुपति सहाय फिराक गोरखपुरी, मुंशी प्रेमचन्द, बाबा कबीर, बुद्ध एवं महावीर का नाम लेते हुए विश्वास व्यक्त किया कि गोरखपुर महोत्सव में सभी संस्कृतियों एवं सभ्यताओं, कलाओं को स्थान मिलेगा, जिससे गोरखपुर में पर्यटन की दृष्टि से देश-विदेश के लोग आकर्षित होंगे।

उन्होंने कहा कि गोरखपुर एवं इसके आस-पास का क्षेत्र तेजी से पर्यटन स्थल के रूप में विकसित हो रहा है। पर्यटन की दृष्टि से इसमें आपार सम्भावनाएं भी हैं। विगत कुछ महीनों से गोरखपुर का स्वरूप एवं परिवेश तेजी से बदल रहा है।मकर संक्रान्ति के अवसर पर उन्होंने कहा कि यह प्रसन्नता की बात है कि गुरू गोरखनाथ द्वारा शुरू की गयी खिचड़ी मेला की परम्परा को वर्तमान में योगी आदित्यनाथ आगे बढ़ा रहे हैं। यहां नेपाल, बिहार एवं दूरदराज क्षेत्रों से लोग खिचड़ी चढ़ाने आते हैं। यह अतीत एवं वर्तमान का अद्भुत संगम है जिससे जनमानस को आनन्द होता है।

उन्होंने कहा कि गोरखपुर महोत्सव में पहले दिन शंकर महादेवन तथा 13 जनवरी को बालीवुड नाइट, शान, भुमि त्रिवेदी, ललित पंडित, अनुराधा पौडवाल, अनुप जलोटा आदि कलाकार गोरखपुर आ रहे हैं। यह तीन दिन गोरखपुर के लोगों को आनन्द देने वाला है। उन्होंने मुम्बई एवं गोरखपुर के रिश्ते की प्रगाढ़ता को बताते हुए कहा कि वे स्वयं भी मुम्बई से हैं और प्रदेश की सेवा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि गोरखपुर महोत्सव से मुम्बई एवं गोरखपुर का रिश्ता और प्रगाढ़ होगा। उन्होंने गोरखपुर महोत्सव की सफलता की शुभकामना व्यक्त करते हुए कहा कि गोरखपुर महोत्सव से सभ्यता एवं संस्कृति मजबूत होगी तथा देश की एकता और अखण्डता को बल मिलेगा।

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