Home देश-दुनिया उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू और कर्नाटक के राज्यपाल श्रवणबेलगोला में राज्याभिषेक में हुए शामिल

उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू और कर्नाटक के राज्यपाल श्रवणबेलगोला में राज्याभिषेक में हुए शामिल

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श्रवणबेलगोला। 10 फरवरी 2018 को श्रवणबेलगोला क्षेत्र में भगवान ऋषभदेव पंचकल्याणक व गोम्मटेश्वर बाहुबली भगवान के महामस्तकाभिषेक कार्यक्रम के अन्तर्गत भगवान ऋषभदेव के राज्याभिषेक के अवसर पर भारत गणराज्य के उपराष्ट्रपति श्री वेंकैया नायडू उपस्थित हुए। वहाँ उन्होंने भगवान बाहुबली, दिगंबर जैन संतों से व चारुकीर्ति  स्वामी जी से आशीर्वाद लिया।

भारत के उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू जी ने कर्नाटक के श्रवणबेलगोला में पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के अंतर्गत राज्याभिषेक महोत्सव में मुख्य अतिथि के रुप में बोलते हुए कहा कि गुरुओं का सम्मान करना हमारी परंपरा रही है। भारतीय संस्कृति में गुरुओं का विशेष महत्व है, इसलिए जब हम यहां पर आए तो सबसे पहले हमने यहां विराजमान गुरुओं को प्रणाम किया। यह गुरू ही पूरे देश में गांव-गांव, शहर-शहर जाकर जो आध्यात्मिक संदेश अपनी पदयात्रा करके दे रहे हैं। यह कोई साधारण कार्य नहीं है।

उन्होंने कहा कि जैन धर्म विश्व के प्राचीन धर्मों में से एक है। जैन दर्शन में सम्यक दर्शन ,सम्यक ज्ञान और सम्यक आचरण पर विशेष बल दिया गया है। जैन दर्शन में ये तीन रत्न के रूप में बताए गए हैं ,यह तीनों ही बहुत जरूरी है । मेरी प्रार्थना है कि सभी मानवों पर भगवान गोमटेश बाहुबली का आशीर्वाद बना रहे।

उन्होंने कहा कि गोम्टेश बाहुबली के दर्शन करने के लिए मैं बहुत पहले आया था जब मैं विधायक था, अपने परिवार के साथ यहां पर आया था। लेकिन आज उपराष्ट्रपति होने के नाते मैं यहां पर इसलिए आया हूं क्योंकि जब किसी आयोजन में राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति जाते हैं तो लोगों को प्रेरणा मिलती है इसीलिए मैं भी इस आयोजन में आया हूं और राष्ट्रपति जी भी आकर गए हैं। उन्होंने कहा कि जैन समाज सदैव दान देने में अग्रणी रहा है। उन्होंने श्रवणबेलगोला  के इतिहास की चर्चा करते हुए चंद्रगुप्त, भद्रबाहु और चंद्र गिरी का भी उल्लेख किया।

उन्होंने जैन दर्शन के प्रमुख सिद्धांत अहिंसा, त्याग, अनेकांत ,स्यादवाद का भी उल्लेख किया। उन्होंने यह भी कहा कि महात्मा गांधी जी को अहिंसा का संदेश चौबीस तीर्थकरों से ही प्राप्त हुआ था। जियो और जीने दो, इससे बड़ा कोई संदेश क्या हो सकता है? जो भगवान महावीर ने दिया है। आगे बढ़ो और सब को आगे बढ़ने दो। वसुधैव कुटुंबकम सर्वे भवंतु सुखिनः यह हमारी भारतीय संस्कृति, भारतीय परंपरा रही है। हमारा परम सौभाग्य है कि हमें यहां आकर पूज्य आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज का संदेश सुनने को मिला। आज पश्चात संस्कृति से विकृति आ रही है, अनेक बुराइयां पनप रही  हैं।

इसको रोकने के लिए ऐसे संतों के संदेश ही कारगर साबित हो सकते हैं। आज समाज में समरसता की बहुत जरूरत है, अहिंसा उसका एक मार्ग है। मेरा धर्म बेहतर उनका धर्म कमजोर है, हमें इसमें नहीं पड़ना चाहिए। विविधता में एकता भारत की विशेषता है। दुनिया भारत की ओर देख रही है। यहां की आध्यात्मिकता सभी को प्रेरणादाई है। यहां की जो संस्कृति है उसकी ओर पूरा विश्व देख रहा है।

उन्होंने जीवन पद्धति को समझाते हुए कहा कि अपनी रोटी को खाना प्रकृति है। छीन कर रोटी को खाना विकृति है और आपस में बांटकर रोटी को खाना संस्कृति है। यही जीवन पद्धति है। मैं यहां आकर बहुत आनंद महसूस कर रहा हूं। एक बार और जरूर यहां आऊंगा। यहां सेवा, शिक्षा के क्षेत्र में जो कार्य हो रहे हैं, वह अनुकरणीय हैं, अभिनंदनीय हैं और प्रशंसनीय हैं। उन्होंने अपना लगता उदबोधन कन्नड़, हिंदी, अंग्रेजी भाषा में दिया। उन्होंने अपने वंक्तव्य को बाहुबली महाराज की जयकार के साथ समाप्त किया।

इस अवसर पर राज्यपाल बज्जूभाई वाला ने कहा कि बाहुबली ने राज्य को छोड़कर शासन करता का अनुभव पाकर हमें उपदेश दिया। जिंदगी में शासन सबको मिलता है लेकिन शासन को त्याग करके समाज को संस्कारिता का उपदेश देना, यह कोई कम काम नहीं है। हमारी संस्कृति में कहा गया है कि प्यार करके उपभोग करना। भगवान महावीर और भगवान बाहुबली ने जो त्याग किया, इसलिए हम दर्शन को आते हैं। जैन धर्म के मानने वाले लोग सुखी संपन्न लोग हैं, संस्कारित हैं।

दुनिया में सबसे संपत्ति वाहन चयन है। सबसे ज्यादा ध्यान दान देने वाले भी जैन धर्म के ही लोग हैं। खूब कमाए लेकिन समाज के लिए दान देना चाहिए। भामाशाह का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भामाशाह ने महाराणा प्रताप को अपनी पूरी संपत्ति दे दी थी। क्षमा वीरस्य भूषणम् भारत यही क्षमा दे सकता है जिसकी रथ से बाहुबली ने समाज को संस्कारित किया। उसका हमें अनुकरण करना चाहिए। राज्यपाल महोदय ने बाहुबली भगवान का जोरदार जयकारा स्वयं लगाया एवं इस अवसर पर उपस्थित विशाल जन मेदिनी से भी बाहुबली भगवान का जोरदार जयकारा लगवाना।

केंद्रीय मंत्री अनन्त कुमार जी ने कहा कि श्रवणबेलगोला में पहला प्राकृत विश्वविद्यालय खोलने के संबंध में मानव संसाधन मंत्री श्री प्रकाश जावड़ेकर जी से मैंने बात की है। उस प्राकृत विश्वविद्यालय को कर्नाटक और भारत सरकार के सहयोग से श्रवणबेलगोला में विकसित करेंगे। जावड़ेकर जी ने अपनी सहमति प्रदान की है। उन्होंने कहा कि श्रवणबेलगोला की तरह ही दूसरा विश्वविद्यालय बिहार के वैशाली में होना चाहिए। इस संबंध में बिहार के मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार जी और उप मुख्यमंत्री जी से बात होना चाहिए। मैं उसकी अगुवाई करूंगा।

श्रवणबेलगोला की तरह ही वैशाली में दूसरा प्राकृतिक विश्वविद्यालय खोलने का भी हमने संकल्प लिया है। यह दोनों विश्वविद्यालय दीप स्तंभ के रूप में काम करेंगे। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी से महोत्सव में पधारने के संबंध में बात हुई है। उन्होंने कहा है कि जब बाहुबली खुद बुला रहे हैं, तो मैं जरूर जाऊंगा। पीएम कार्यालय से बात करके उसको हम आगे बढ़ाएंगे। गोम्टेश  बाहुबली स्वामी हमारी धरोहर हैं।

कर्मयोगी स्वस्ति श्री चारु कीर्ति जी महाराज ने इस अवसर पर कहा कि पूरे विश्व में श्रवणबेलगोला वह भी बाहुबली के नाम से प्रसिद्ध है। उन्होंने उपराष्ट्रपति श्री वेंकैया नायडू जी द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना और प्रशंसा की तथा श्रवणबेलगोला के प्रति उनकी निष्ठा, श्रद्धा, आस्था और भक्ति की प्रशंसा की। साथ में ही केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार जी की भी श्रवणबेलगोला के लिए उनके द्वारा दिए जा रहे सहयोग का अभिनंदन किया।

इस अवसर पर आचार्य श्री पुष्पदंत सागर जी महाराज ने कहा कि श्रवणबेलगोला को 5 किलोमीटर दूरी तक अहिंसा क्षेत्र घोषित किया जाए। इस अवसर पर 108 ग्रंथों का भी लोकार्पण उप राष्ट्रपति महोदय एवं उपस्थित अतिथियों ने किया। इस अवसर पर महोत्सव समिति की अध्यक्षा सरिता जैन, कर्नाटक सरकार के कैबिनेट मंत्री मंजू, कपड़ा मंत्री एम लभानि, बेंगलुरु के सांसद, श्रवणबेलगोला के विधायक एवं अन्य गणमान्य महानुभाव उपस्थित रहे। उक्त जानकारी डॉक्टर सुनील जैन संचय ने प्रदान की है।

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