मतदाता, राजनीतिक दल, निर्वाचन प्रक्रिया, कर्मचारी और तकनीकी सुधारों को ध्यान में रखकर उठाए गए व्यापक कदम
नई दिल्ली। भारत निर्वाचन आयोग ने देश में लोकतांत्रिक प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी, समावेशी और सुलभ बनाने के उद्देश्य से 18 नई पहलें शुरू की हैं। इन पहलों में मतदाताओं से लेकर राजनीतिक दलों, निर्वाचन कर्मचारियों तथा तकनीकी सुधारों तक सभी प्रमुख पक्षों को ध्यान में रखा गया है। यह पहल मुख्य निर्वाचन आयुक्त श्री ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में प्रारंभ की गई हैं।
मतदाताओं के लिए सुविधाएं बढ़ीं
भीड़भाड़ कम करने के लिए अब एक मतदान केंद्र पर अधिकतम 1200 मतदाताओं की सीमा तय की गई है। उच्च-आवासीय कॉलोनियों में नए मतदान केंद्र स्थापित होंगे। मतदाता सूची को अद्यतन करने हेतु मृत्यु पंजीकरण का डेटा अब रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया से सीधे प्राप्त कर सत्यापित किया जाएगा। साथ ही, मतदाता जानकारी पर्चियों में श्रृंखला संख्या और भाग संख्या को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित किया जाएगा।
राजनीतिक दलों के साथ संवाद और प्रशिक्षण
देशभर में सीईओ, डीईओ और ईआरओ स्तर पर 4719 सर्वदलीय बैठकें आयोजित की गईं, जिनमें 28,000 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। आम आदमी पार्टी, भाजपा, बसपा, माकपा और एनपीपी समेत विभिन्न राष्ट्रीय व राज्यीय दलों से विशेष बैठकें की गईं। बिहार, तमिलनाडु और पुडुचेरी में बूथ स्तर एजेंटों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम भी संचालित किए गए।
तकनीकी क्षेत्र में बड़ा बदलाव: ECINET डैशबोर्ड की शुरुआत
निर्वाचन आयोग ने ECINET नामक एकीकृत डैशबोर्ड की शुरुआत की है, जो 40 से अधिक ऐप्स और वेबसाइट्स को एक ही प्लेटफॉर्म पर लाएगा। डुप्लीकेट ईपीआईसी नंबर की समस्या को खत्म करने के लिए एक नई प्रणाली भी लागू की गई है, जिससे प्रत्येक मतदाता को विशिष्ट ईपीआईसी नंबर मिल सकेगा।
28 हितधारकों की पहचान और प्रशिक्षण
मतदाता सूची और निर्वाचन संचालन में शामिल 28 हितधारकों की पहचान की गई है। इन सभी के लिए संबंधित कानूनों, नियमों और आयोग के निर्देशों पर आधारित प्रशिक्षण प्रस्तुतियाँ तैयार की जा रही हैं।
बीएलओ को पहचान पत्र और प्रशिक्षण
बूथ स्तर अधिकारियों को मानक फोटो पहचान पत्र प्रदान किए जा रहे हैं। नई दिल्ली स्थित आईआईआईडीईएम में अब तक 3000 से अधिक बीएलओ सुपरवाइज़रों को प्रशिक्षित किया जा चुका है, और आगामी वर्षों में एक लाख से अधिक बीएलओ सुपरवाइज़र प्रशिक्षित किए जाएंगे।
कार्यालय में प्रशासनिक सुधार
कार्यालयों में बायोमेट्रिक हाजिरी प्रणाली लागू की गई है। साथ ही, ई-ऑफिस प्रणाली की शुरुआत की गई है और सभी राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों के साथ नियमित बैठकें आयोजित की जा रही हैं।
उत्तर प्रदेश में प्रभावी क्रियान्वयन
उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी श्री नवदीप रिणवा ने बताया कि राज्य में राष्ट्रीय एवं राज्यीय मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के साथ कुल 479 बैठकें आयोजित की गईं, जिनमें 2,585 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। IIIDEM, नई दिल्ली में जिला निर्वाचन अधिकारी, निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी और बीएलओ सुपरवाइज़र का प्रशिक्षण विभिन्न चरणों में जारी है।
इन पहलों के माध्यम से निर्वाचन आयोग यह सुनिश्चित कर रहा है कि भारत की चुनाव प्रक्रिया न केवल विश्वसनीय और निष्पक्ष हो, बल्कि भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप तकनीकी रूप से सुदृढ़ भी हो।