जैन धर्म में सूर्यास्त के बाद भोजन न करने की परंपरा लगभग 2500 वर्ष पुरानी मानी जाती है। यह नियम अहिंसा, आत्मसंयम, सूक्ष्म जीवों की रक्षा और आध्यात्मिक साधना से जुड़ा हुआ है। महावीर स्वामी की शिक्षाओं पर आधारित यह परंपरा आज भी लाखों जैन अनुयायियों द्वारा अपनाई जाती है।