
लखनऊ। राजधानी के आशियाना जैन मंदिर में चल रहे चातुर्मास वर्षायोग के अंतर्गत रविवार को राजलक्ष्मी पैलेस में ‘राष्ट्रहित पर विचार गोष्ठी एवं सम्मान समारोह’ का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम पूज्य उपाध्याय श्री 108 वीहसंत सागर जी महाराज के सान्निध्य में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में राष्ट्रहित, सामाजिक समरसता, नैतिक मूल्यों, संस्कारों तथा युवाओं की राष्ट्र निर्माण में भूमिका जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर वक्ताओं ने अपने विचार रखे। इस अवसर पर समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली जैन समाज की प्रतिभाओं एवं गणमान्य व्यक्तियों को सम्मानित भी किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ लखनऊ के रेडियो जॉकी पुनीत जैन द्वारा प्रस्तुत मंगलाचरण से हुआ। इसके बाद राजेश जैन (चौक) ने दीप प्रज्वलित किया, जबकि संजीव जैन ‘बच्चू’ (चौक) ने चित्र का अनावरण कर कार्यक्रम को औपचारिक रूप से आगे बढ़ाया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में समाज के वरिष्ठजन, महिला मंडल, युवा मंडल एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे। आयोजन के दौरान राष्ट्रहित और समाजहित के लिए सामूहिक जिम्मेदारी तथा सकारात्मक भूमिका निभाने का संदेश प्रमुखता से सामने आया।

विभिन्न क्षेत्रों में योगदान देने वाली प्रतिभाओं का सम्मान
समारोह में जैन समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले विशिष्ट व्यक्तित्वों को सम्मानित किया गया। सम्मानित होने वालों में शुभम जैन, जॉइंट डायरेक्टर, वित्त एवं उद्योग विभाग; शुभ्रा जैन, असिस्टेंट प्रोफेसर, ट्रिपल आईआईटी, एके जैन, पूर्व डीजीपी, उत्तर प्रदेश पुलिस, विपिन जैन, चार्टर्ड अकाउंटेंट; कैलाश चंद्र जैन सर्राफ, अध्यक्ष, सर्राफा एसोसिएशन एवं चंदा रानी जैन चैरिटेबल ट्रस्ट, शैलेन्द्र जैन, मेंबर, गवर्निंग काउंसिल ऑफ एसएमई, वीके जैन, सेवानिवृत्त अतिरिक्त महानिरीक्षक, कारागार विभाग, उत्तर प्रदेश; आशीष कुमार जैन, डिप्टी चीफ लीगल डिफेंस काउंसिल तथा जेके जैन, अधिवक्ता सहित अनेक विशिष्ट जन शामिल रहे।
राष्ट्र निर्माण में हर नागरिक की भागीदारी जरूरी
संगोष्ठी को संबोधित करते हुए शुभम जैन ने कहा कि राष्ट्र निर्माण केवल सरकारों का दायित्व नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक की सक्रिय भागीदारी से ही सशक्त भारत का निर्माण संभव है। उन्होंने युवाओं से ईमानदारी, नवाचार और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना के साथ देश के विकास में योगदान देने का आह्वान किया। वहीं शुभ्रा जैन ने शिक्षा और अनुसंधान को राष्ट्र की प्रगति का प्रमुख आधार बताते हुए कहा कि ज्ञान, तकनीक और नैतिक मूल्यों का समन्वय भारत को वैश्विक नेतृत्व की ओर ले जा सकता है। उन्होंने युवाओं से शिक्षा के साथ संस्कार और सामाजिक जिम्मेदारी को भी जीवन का हिस्सा बनाने की अपील की।

अनुशासन, चरित्र और कर्तव्यनिष्ठा से मजबूत होता है राष्ट्र
पूर्व डीजीपी एके जैन ने कहा कि किसी भी राष्ट्र की मजबूती उसके नागरिकों के अनुशासन, चरित्र और कर्तव्यनिष्ठा पर निर्भर करती है। उन्होंने युवाओं से कानून के प्रति सम्मान रखने, सामाजिक उत्तरदायित्व निभाने और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने का आह्वान किया। सेवानिवृत्त अतिरिक्त महानिरीक्षक, कारागार विभाग, उत्तर प्रदेश वीके जैन ने कहा कि सशक्त राष्ट्र के निर्माण के लिए आर्थिक विकास के साथ नैतिक मूल्यों और सामाजिक समरसता को भी समान महत्व दिया जाना चाहिए। उन्होंने युवाओं से सेवा भाव, राष्ट्रभक्ति और सकारात्मक नेतृत्व के माध्यम से समाज को नई दिशा देने की अपील की।
सेवा और परोपकार से मिलता है आत्मिक संतोष : कैलाश चंद्र जैन सर्राफ
कैलाश चंद्र जैन सर्राफ ने अपने उद्बोधन में चंदा रानी जैन चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा किए जा रहे सेवा कार्यों की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि ट्रस्ट के माध्यम से मेडिकल कॉलेज एवं ट्रॉमा सेंटर में जरूरतमंद और आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों की निरंतर सहायता की जा रही है। उन्होंने कहा कि सेवा कार्यों से आत्मिक सुख और संतोष की अनुभूति होती है। कई बार जरूरतमंद मरीज को दी गई छोटी-सी आर्थिक सहायता भी उसके लिए जीवनदान साबित हो सकती है। उन्होंने समाज के सक्षम वर्ग से भी सेवा, परोपकार और जरूरतमंदों की सहायता के कार्यों में आगे आने का आह्वान किया।
जैन समाज व्यापार के साथ राष्ट्र निर्माण में भी निभा रहा महत्वपूर्ण भूमिका
पूज्य उपाध्याय श्री 108 वीहसंत सागर जी महाराज ने अपने प्रेरणादायी प्रवचन में कहा कि जैन समाज को केवल व्यापार करने वाले समाज के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जैन समाज राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है और समाज के लोग उद्योग, व्यापार, शिक्षा, प्रशासन, चिकित्सा, न्याय तथा सामाजिक सेवा सहित विभिन्न क्षेत्रों में देश की प्रगति में योगदान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि जैन समाज अपने बच्चों को शिक्षा, संस्कार, सेवा और राष्ट्रहित के कार्यों में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। समाज के लोग अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने, रोजगार के अवसर पैदा करने तथा करों के माध्यम से राष्ट्र के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

संस्कारयुक्त शिक्षा और कर्तव्यनिष्ठ नागरिकों पर राष्ट्र की प्रगति निर्भर
विचार गोष्ठी के दौरान वक्ताओं ने सामाजिक समरसता, नैतिक मूल्यों, संस्कारों और युवाओं की राष्ट्र निर्माण में भूमिका पर विस्तार से विचार रखे। वक्ताओं ने कहा कि राष्ट्र की वास्तविक उन्नति तभी संभव है, जब समाज का प्रत्येक वर्ग अपने कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक पालन करे। भावी पीढ़ी को केवल आधुनिक शिक्षा ही नहीं, बल्कि संस्कार, नैतिकता, सामाजिक जिम्मेदारी और राष्ट्रहित की भावना से भी जोड़ना आवश्यक है। युवाओं को देश की शक्ति बताते हुए वक्ताओं ने उन्हें सकारात्मक सोच के साथ समाज और राष्ट्र के विकास में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया।
आयोजन में इनका रहा विशेष सहयोग
कार्यक्रम के सफल आयोजन में अंकित जैन, बंटी जैन, शरद जैन, चंद्रप्रकाश जैन, आदिश जैन, रितेश जैन, संजीव जैन, अजय जैन, सिद्धार्थ जैन एवं समर्थ जैन सहित अनेक कार्यकर्ताओं का विशेष सहयोग रहा। समारोह में समाज के वरिष्ठजनों के साथ महिला मंडल, युवा मंडल और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की गरिमामयी उपस्थिति रही।

कार्यक्रम के समापन पर सभी अतिथियों, वक्ताओं, प्रतिभागियों और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया गया। साथ ही राष्ट्रहित और समाजहित के कार्यों में निरंतर योगदान देने तथा सेवा, संस्कार और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया गया।