
लखनऊ। राजधानी के आशियाना स्थित दिगंबर जैन मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं को विनय, नम्रता और आध्यात्मिक चेतना का संदेश देने वाले भव्य मानस्तंभ का निर्माण कराया जाएगा। करीब 35 फुट ऊंचे इस मानस्तंभ में जैन धर्म के 24 तीर्थंकर भगवानों की आकर्षक एवं दिव्य प्रतिमाएं चारों दिशाओं में स्थापित की जाएंगी। मानस्तंभ का भूमि पूजन एवं शिलान्यास 30 अगस्त 2026 को किया जाएगा। निर्माण को लेकर जैन समाज में उत्साह का माहौल है और इसे मंदिर परिसर के धार्मिक वैभव में महत्वपूर्ण विस्तार के रूप में देखा जा रहा है।
निर्माण समिति के मीडिया प्रभारी सिद्धार्थ जैन ने बताया कि करीब 12 फुट व्यास वाला यह मानस्तंभ सफेद संगमरमर से तैयार किया जाएगा। पूज्य उपाध्याय श्री 108 वीहसंत सागर जी महाराज के सान्निध्य में निर्माण कार्य संपन्न होगा। समिति ने मानस्तंभ के निर्माण को लगभग दो माह में पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। निर्माण पूर्ण होने के बाद यह मानस्तंभ न केवल मंदिर परिसर की सुंदरता बढ़ाएगा, बल्कि श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक संदेश का भी प्रमुख केंद्र बनेगा।
नवंबर में होगा भव्य पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव
समिति के अध्यक्ष चंद्र प्रकाश जैन ने बताया कि मानस्तंभ का निर्माण पूरा होने के बाद नवंबर 2026 में भव्य पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव आयोजित किया जाएगा। इस दौरान मानस्तंभ में स्थापित 24 तीर्थंकर भगवानों की प्रतिमाओं की विधिवत प्रतिष्ठा की जाएगी। आयोजन को जैन समाज के लिए धार्मिक, आध्यात्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया जा रहा है। पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में देशभर से श्रद्धालुओं और धर्मप्रेमियों के शामिल होने की संभावना है। इसके लिए व्यापक स्तर पर तैयारियां की जाएंगी।
अहंकार त्याग और विनय का संदेश देता है मानस्तंभ
मानस्तंभ केवल एक भव्य स्थापत्य नहीं, बल्कि जैन दर्शन में विनय, नम्रता और अहंकार त्याग का महत्वपूर्ण प्रतीक माना जाता है। सामान्यतः मानस्तंभ का निर्माण जिनालय अथवा मूलनायक वेदी के सामने किया जाता है। मंदिर में प्रवेश करते समय जब श्रद्धालु इस ऊंचे स्तंभ को देखता है तो उसे यह संदेश मिलता है कि भगवान के समक्ष सभी समान हैं और मनुष्य को अपने अहंकार का त्याग कर विनम्रता के साथ प्रभु की आराधना करनी चाहिए।
आत्मचिंतन और आध्यात्मिक जागृति की प्रेरणा
समिति के मंत्री अजय जैन ने बताया कि मानस्तंभ मनुष्य को अपने भीतर के अहंकार, क्रोध, ईर्ष्या और लोभ को त्यागने तथा भगवान की आराधना और आत्मचिंतन की ओर बढ़ने की प्रेरणा देता है। इसका उद्देश्य श्रद्धालुओं को बाहरी आडंबर और अहंकार से दूर कर आत्मिक गुणों की ओर अग्रसर करना है। मानस्तंभ व्यक्ति को यह स्मरण कराता है कि वास्तविक श्रेष्ठता बाहरी वैभव में नहीं, बल्कि विनय, संयम और सद्गुणों में निहित है।
बाहरी वैभव नहीं, आंतरिक गुणों को पहचानने का संदेश
मानस्तंभ के माध्यम से यह संदेश भी दिया जाएगा कि मनुष्य को बाहरी वैभव के बजाय अपनी आंतरिक शक्ति और आत्मिक गुणों को पहचानकर जीवन को श्रेष्ठ बनाने का प्रयास करना चाहिए। 24 तीर्थंकर भगवानों की प्रतिमाओं की स्थापना श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक प्रेरणा का केंद्र बनेगी। आशियाना दिगंबर जैन मंदिर परिसर में प्रस्तावित यह भव्य मानस्तंभ आने वाले समय में धार्मिक आस्था, विनय और आत्मचिंतन के प्रमुख प्रतीक के रूप में अपनी पहचान बना सकता है।