
निगरानी, जवाबदेही और सख्ती से विकास कार्यों में आई तेजी—अनियमितताओं पर अंकुश लगाने की दिशा में लगातार प्रयास
देवा, बाराबंकी। विकासखंड देवा में पिछले करीब दो वर्षों से खंड विकास अधिकारी के पद पर कार्यरत डॉ. नेहा शर्मा की कार्यशैली क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता, विकास कार्यों की निगरानी और अधिकारियों-कर्मचारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने पर जोर देने के कारण विकासखंड की प्रशासनिक कार्यप्रणाली में बदलाव देखने को मिल रहा है। स्थानीय स्तर पर उनकी कार्यशैली को लेकर सकारात्मक चर्चा है और माना जा रहा है कि सख्त निगरानी के चलते अनियमितताओं की गुंजाइश पहले की अपेक्षा कम हुई है।
डॉ. नेहा शर्मा के कार्यकाल की प्रमुख विशेषता विकास कार्यों की नियमित समीक्षा और योजनाओं को निर्धारित मानकों के अनुरूप धरातल पर उतारने पर जोर देना बताया जा रहा है। ग्राम पंचायतों में संचालित विकास योजनाओं की प्रगति की जानकारी लेने के साथ ही संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को समयबद्ध तरीके से कार्य पूरा करने के निर्देश दिए जाते हैं। इससे ग्राम पंचायत स्तर पर भी जिम्मेदारी का एहसास बढ़ा है।
विकासखंड में मनरेगा, आवास योजना, स्वच्छता, नाली निर्माण, खड़ंजा, सड़क तथा अन्य ग्रामीण विकास योजनाओं को लेकर अधिकारियों की निगरानी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। योजनाओं में पात्र लाभार्थियों को लाभ मिले और सरकारी धन का उपयोग निर्धारित उद्देश्य के लिए हो, इस पर विशेष ध्यान दिए जाने की बात सामने आ रही है। कार्यों की प्रगति की समीक्षा और मौके पर निरीक्षण की प्रक्रिया से लापरवाही पर भी लगाम कसने में मदद मिल रही है।
जवाबदेही बनी कार्यशैली का आधार
सरकारी व्यवस्था में पारदर्शिता तभी प्रभावी हो सकती है जब अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय हो। इसी को ध्यान में रखते हुए विकासखंड स्तर पर कार्यों की समीक्षा और प्रगति की जानकारी लेने की व्यवस्था को प्राथमिकता दी जा रही है। किसी योजना में अपेक्षित प्रगति न होने पर संबंधित कर्मियों से जानकारी लेने और आवश्यक दिशा-निर्देश देने की प्रक्रिया को प्रशासनिक अनुशासन की दृष्टि से अहम माना जा रहा है।
स्थानीय लोगों के बीच भी यह चर्चा है कि अधिकारी यदि नियमित रूप से विकास कार्यों की निगरानी करें तो योजनाओं में होने वाली संभावित अनियमितताओं पर स्वाभाविक रूप से अंकुश लगता है। यही कारण है कि देवा ब्लॉक में बीडीओ डॉ. नेहा शर्मा की सक्रियता को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।
भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने को सख्त निगरानी जरूरी
ग्रामीण विकास योजनाओं में पारदर्शिता बनाए रखना शासन की प्राथमिकताओं में शामिल है। करोड़ों रुपये की विकास योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे, इसके लिए अधिकारी की सक्रिय भूमिका महत्वपूर्ण होती है। डॉ. नेहा शर्मा की कार्यशैली में भी निरीक्षण, समीक्षा और जवाबदेही को प्रमुखता मिलने की बात कही जा रही है। इससे भ्रष्टाचार और सरकारी योजनाओं में अनियमितता की संभावनाओं को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
हालांकि किसी क्षेत्र में भ्रष्टाचार कम होने का आधिकारिक आकलन सरकारी आंकड़ों, जांच रिपोर्टों और विभागीय अभिलेखों के आधार पर ही किया जा सकता है, लेकिन दो वर्षों के कार्यकाल में प्रशासनिक निगरानी को मजबूत करने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
ग्रामीणों को योजनाओं का लाभ दिलाना प्राथमिकता
देवा विकासखंड में बड़ी संख्या में ग्रामीण परिवार सरकारी योजनाओं पर निर्भर हैं। ऐसे में योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाना प्रशासन की सबसे बड़ी जिम्मेदारियों में शामिल है। आवास, रोजगार, स्वच्छता और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी योजनाओं में पारदर्शिता रहने से सीधे ग्रामीणों को फायदा मिलता है। बीडीओ स्तर से योजनाओं की समीक्षा और कर्मचारियों को निर्देश दिए जाने से इस व्यवस्था को गति मिलने की बात कही जा रही है।
दो वर्ष का कार्यकाल किसी भी अधिकारी की कार्यशैली को समझने के लिए पर्याप्त समय माना जाता है। इस अवधि में डॉ. नेहा शर्मा ने विकासखंड कार्यालय की कार्यप्रणाली में अनुशासन, निगरानी और जवाबदेही को महत्व दिया है। स्थानीय स्तर पर उनकी इसी कार्यशैली की चर्चा है।
कुल मिलाकर देवा विकासखंड में पारदर्शी प्रशासन, नियमित निगरानी और जवाबदेही पर जोर देने की पहल को ग्रामीण विकास के लिए सकारात्मक कदम माना जा रहा है। यदि यह व्यवस्था आगे भी इसी तरह निरंतर जारी रहती है तो सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता बढ़ने के साथ-साथ पात्र लाभार्थियों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने और अनियमितताओं पर अंकुश लगाने में और बेहतर परिणाम सामने आने की उम्मीद है।