दूरसंचार विभाग ने लिया विकसित भारत के निर्माण का संकल्प: नई तकनीक अपनाने और नेटवर्क सुरक्षा मजबूत करने पर जोर

लखनऊ। स्वतंत्रता दिवस की 80वीं वर्षगांठ के अवसर पर उत्तर प्रदेश पूर्वी एलएसए, दूरसंचार विभाग की ओर से आरटीटीसी, आशियाना परिसर में भव्य स्वतंत्रता दिवस समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रगीत ‘वंदेमातरम्’ के सामूहिक गायन से हुआ। इसके बाद अपर महानिदेशक मनीष कुमार ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया और उपस्थित अधिकारियों, कर्मचारियों एवं नागरिकों ने सामूहिक रूप से राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ का गायन किया। ध्वजारोहण के साथ ही पूरा परिसर देशभक्ति, उत्साह और राष्ट्रप्रेम के भाव से सराबोर हो गया।

समारोह में दूरसंचार विभाग, भारत संचार निगम लिमिटेड, इंग्लिश एंड फॉरेन लैंग्वेजेज यूनिवर्सिटी (ईएफएलयू) क्षेत्रीय परिसर लखनऊ तथा वायरलेस मॉनिटरिंग स्टेशन (डब्ल्यूएमएस) के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के साथ स्थानीय नागरिकों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान देशभक्ति गीतों की प्रस्तुतियों और ‘भारत माता की जय’ तथा ‘वंदेमातरम्’ के जयघोष से पूरा परिसर गूंजता रहा। समारोह ने स्वतंत्रता संग्राम के बलिदानों को याद करने के साथ ही राष्ट्र निर्माण के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता का संदेश दिया।

विकसित भारत के लिए सेवा भाव और दक्षता को प्राथमिकता देने का आह्वान

इस खास मौके पर अपर महानिदेशक मनीष कुमार ने कहा कि विकसित भारत के संकल्प को साकार करने के लिए प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी को अपने दैनिक कार्यों में सेवा भाव, अनुशासन, पारदर्शिता और दक्षता को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी। उन्होंने कहा कि आज दूरसंचार देश के सामाजिक और आर्थिक विकास की आधारभूत आवश्यकता बन चुका है। डिजिटल शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, ई-गवर्नेंस और वित्तीय समावेशन से लेकर व्यापार, उद्योग, आपदा प्रबंधन और नागरिक सुरक्षा तक, दूरसंचार सेवाएं देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

नई तकनीक अपनाने और नेटवर्क सुरक्षा मजबूत करने पर जोर

अपर महानिदेशक मनीष कुमार ने कहा कि तेजी से बदलते तकनीकी परिदृश्य में दूरसंचार क्षेत्र के लिए नई प्रौद्योगिकियों को अपनाना, सेवाओं की गुणवत्ता और विश्वसनीयता में निरंतर सुधार करना तथा नेटवर्क की सुरक्षा और मजबूती सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है। उन्होंने अधिकारियों एवं कर्मचारियों से नागरिक-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाने तथा कार्यप्रणाली में नवाचार, तकनीकी दक्षता और त्वरित निर्णय क्षमता को बढ़ावा देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि बदलती तकनीकी जरूरतों के अनुरूप दूरसंचार क्षेत्र को लगातार खुद को मजबूत और आधुनिक बनाना होगा, ताकि देश के प्रत्येक नागरिक तक सुरक्षित और भरोसेमंद संचार सेवाएं पहुंचाई जा सकें।

संसाधनों के मितव्ययी और जिम्मेदाराना उपयोग की अपील

अपर महानिदेशक ने उपलब्ध वित्तीय एवं अन्य संसाधनों के प्रभावी, मितव्ययी और जिम्मेदाराना उपयोग पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी अपने दायित्वों का पूरी निष्ठा एवं उत्कृष्टता के साथ निर्वहन करके एक सशक्त, सुरक्षित, समावेशी और डिजिटल रूप से सक्षम भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है। उन्होंने कर्मचारियों से अपने कार्यों में जवाबदेही और पारदर्शिता बनाए रखते हुए विभागीय संसाधनों का अधिकतम प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने की अपील की।

उन्होंने कहा कि आज के डिजिटल युग में दूरसंचार अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। जिस प्रकार देश के वीर सैनिक सीमाओं की रक्षा कर रहे हैं, उसी प्रकार दूरसंचार क्षेत्र से जुड़े अधिकारी और कर्मचारी देश की डिजिटल सीमाओं और संचार सुरक्षा की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश की प्रगति व्यापक और विश्वसनीय कनेक्टिविटी पर निर्भर है। ऐसे में सुदूर गांवों तक आधुनिक दूरसंचार तकनीकों की पहुंच सुनिश्चित करना, साइबर खतरों से नेटवर्क को सुरक्षित रखना तथा नागरिकों को पारदर्शी और सुरक्षित संचार माध्यम उपलब्ध कराना भी राष्ट्र सेवा का महत्वपूर्ण स्वरूप है।

मजबूत दूरसंचार ढांचे के निर्माण का लिया संकल्प

मनीष कुमार ने सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों से पूरी ईमानदारी, तकनीकी विशेषज्ञता और निष्ठा के साथ देश के दूरसंचार बुनियादी ढांचे को और मजबूत बनाने का संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि तकनीकी प्रगति के इस दौर में दूरसंचार क्षेत्र की भूमिका केवल संचार सुविधा उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की आर्थिक प्रगति, डिजिटल समावेशन, नागरिक सुरक्षा और सुशासन की मजबूत आधारशिला भी है।

‘भारत माता की जय’ और ‘वंदेमातरम्’ के जयघोष से गूंजा परिसर

कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित लोगों ने एक स्वर में ‘भारत माता की जय’ और ‘वंदेमातरम्’ के जयघोष किए। स्वतंत्रता दिवस का यह आयोजन देश के गौरवशाली इतिहास और स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को स्मरण करने के साथ-साथ राष्ट्र की प्रगति, सुशासन और विकसित भारत के निर्माण के लिए निरंतर समर्पण का संकल्प मजबूत करने वाला अवसर बना।