ED की मनी लॉन्ड्रिंग जांच में TMC और Carewell Aviation के बीच कथित 160 करोड़ रुपये के लेनदेन की जांच हो रही है। जेट और हेलीकॉप्टर खरीद से जुड़ी पूरी कहानी जानिए।

नई दिल्ली/अमर भारती। पश्चिम बंगाल की राजनीति से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) की मनी लॉन्ड्रिंग जांच में तृणमूल कांग्रेस (TMC) और कोलकाता की कंपनी केयरवेल एविएशन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (Carewell Aviation) के बीच हुए कथित वित्तीय लेनदेन को लेकर सवाल उठाए गए हैं। जांच के अनुसार, पार्टी की ओर से कंपनी को करीब 160 करोड़ रुपये दिए गए, जिसके बाद कंपनी ने एक एम्ब्राएर जेट और एक अगस्ता वीआईपी हेलीकॉप्टर खरीदा। जांचकर्ताओं का आरोप है कि इन विमानों को बाद में TMC को ही किराए पर दिया गया। ED अब इस पूरे लेनदेन की संरचना और पैसों के इस्तेमाल की जांच कर रहा है।
TMC ने कंपनी को दिया ब्याज-मुक्त सिक्योरिटी डिपॉजिट?
सूत्रों के अनुसार, जांच का एक प्रमुख बिंदु TMC की ओर से केयरवेल एविएशन को कथित तौर पर दिए गए 88.5 करोड़ रुपये के ब्याज-मुक्त सिक्योरिटी डिपॉजिट से जुड़ा है। जांच एजेंसी के मुताबिक, कंपनी के पास विमान खरीदने के लिए पर्याप्त स्वयं का फंड नहीं था। आरोप है कि TMC से रकम मिलने के बाद केयरवेल एविएशन ने इसका एक हिस्सा अपनी ऑफशोर इकाई केयरवेल फ्लाईजेट आईएफएससी प्राइवेट लिमिटेड (Carewell Aviation) को ट्रांसफर किया। यह कंपनी गुजरात के गिफ्ट सिटी में पंजीकृत बताई जा रही है। इसके बाद इसी व्यवस्था के जरिए विमान खरीदने की बात जांच में सामने आई है।
जेट और हेलीकॉप्टर की खरीद पर भी जांच
जांच के अनुसार, केयरवेल एविएशन (Carewell Aviation) का गठन 14 सितंबर 2021 को हुआ था। कंपनी के निदेशकों के तौर पर पवन जाजू और रमेश जाजू के नाम सामने आए हैं। कंपनी ने कथित तौर पर 6 जून 2023 को एम्ब्राएर लिगेसी 600 जेट खरीदा। इसके बाद 17 अप्रैल 2025 को अगस्ता 109 ग्रैंड हेलीकॉप्टर खरीदा गया। ED की जांच में यह भी देखा जा रहा है कि इन दोनों विमानों की खरीद के लिए इस्तेमाल किए गए धन का वास्तविक स्रोत क्या था और इसमें TMC से प्राप्त रकम की क्या भूमिका रही।
केमैन आइलैंड से जुड़े करीब 16 करोड़ के ट्रांसफर की भी जांच
जांच एजेंसी कथित तौर पर केमैन आइलैंड से जुड़े करीब 16 करोड़ रुपये के एक अन्य फंड ट्रांसफर की भी जांच कर रही है। अधिकारियों का फोकस यह पता लगाने पर है कि इस रकम का विमान खरीद और पूरी वित्तीय व्यवस्था से कोई संबंध था या नहीं। मनी लॉन्ड्रिंग जांच में ऐसे अंतरराष्ट्रीय वित्तीय लेनदेन के स्रोत, लाभार्थी और इस्तेमाल की जांच अहम मानी जाती है। Carewell Aviation पर ट्रांसफर के आरोप लगे है।
TMC को विमान किराए पर देने की क्या थी व्यवस्था?
जांच के मुताबिक, TMC (Carewell Aviation) को जेट के 72 महीने और हेलीकॉप्टर के 56 महीने के इस्तेमाल के लिए GST को छोड़कर करीब 186.9 करोड़ रुपये का भुगतान करना था। जांचकर्ताओं के अनुसार, पार्टी ने न्यूनतम गारंटीड फ्लाइंग आवर्स का पूरा इस्तेमाल नहीं किया। इसके बावजूद वर्ष 2021 से 2026 के दौरान TMC ने अन्य कंपनियों से विमान और हेलीकॉप्टर किराए पर लेने पर कथित तौर पर करीब 149 करोड़ रुपये खर्च किए। इसी वजह से जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि विमानों को किराए पर लेने की पूरी व्यवस्था व्यावसायिक रूप से वास्तविक थी या इसके पीछे कोई अन्य वित्तीय उद्देश्य था।
ED को क्यों संदिग्ध लग रही है पूरी व्यवस्था?
जांचकर्ताओं का आरोप है कि यह पूरी व्यवस्था एक कृत्रिम व्यावसायिक संरचना जैसी प्रतीत होती है। उनका तर्क है कि जिन विमानों को बाद में TMC को किराए (Carewell Aviation) पर दिया गया, उनकी खरीद में कथित तौर पर पार्टी से प्राप्त रकम का इस्तेमाल हुआ। यानी जांच का मुख्य सवाल यह है कि क्या पार्टी ने कंपनी को पैसा देकर विमान खरीदने में अप्रत्यक्ष रूप से मदद की और फिर उन्हीं विमानों को किराए पर लेकर भुगतान किया। हालांकि, इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने और संबंधित पक्षों के जवाब सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा।
अब आगे क्या होगा?
ED इस पूरे वित्तीय लेनदेन, कंपनियों के बीच धन के ट्रांसफर, विमान खरीद और TMC द्वारा किए गए (Carewell Aviation) भुगतान की जांच कर रही है। जांच में यह भी देखा जाएगा कि रकम का वास्तविक लाभ किसे मिला और क्या किसी कानून का उल्लंघन हुआ। फिलहाल, जांच में सामने आए आरोपों को अंतिम दोषसिद्धि नहीं माना जा सकता। मामले में ED की आगे की कार्रवाई और संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया से तस्वीर और साफ होने की उम्मीद है।
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