Online Shopping Scam: असली या नकली, क्या आप जानते हैं आप जिस पर भरोसा करके शॉपिंग कर रहे हैं. वो ब्रांड सचमुच असली है या फिर आप भी बन चुके हैं नकली मार्केट का शिकार, ऑनलाइन शॉपिंग घर बैठे एक क्लिक पर सब कुछ मिल जाता है। लेकिन इसी सुविधा ने जन्म दिया है एक बहुत बड़े खतरे को। नकली और जाली सामानों के कारोबार को, जो चुपचाप हमारे घरों तक पहुँच रहे हैं। और हैरानी की बात ये है कि ये जाल सिर्फ बढ़ नहीं रहा बल्कि हर साल दोगुनी रफ्तार से फैल रहा है।
Online Shopping Scam: 6 महीने में शिकायतें डेढ़ गुना बढ़ीं
राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन के आंकड़े हैरान करने वाले हैं। साल 2023 में नकली सामान की शिकायतें थीं 2,211,… 2024 में यह बढ़कर 4,997 हो गईं। और सिर्फ इस साल, यानी 2025 के पहले 6 महीनों में ही शिकायतें 7,221 तक पहुंच गईं यानी, महज़ दो साल में नकली सामान से जुड़ी शिकायतें तीन गुना से भी ज्यादा बढ़ गई हैं।
एक लोकल सर्वे के मुताबिक, साल 2024 में करीब 20 फीसदी ऑनलाइन खरीदारों को कम से कम एक बार नकली या जाली सामान मिला। सबसे ज्यादा शिकायतें आती हैं. जूते , कॉस्मेटिक्स, परफ्यूम और सुगंधित प्रोडक्ट्स यानी जिन प्रोडक्ट्स पर भरोसा और पैसा सबसे ज्यादा खर्च होता है. वही सबसे ज्यादा नकली निकलते हैं।
भारतीय मानक ब्यूरो यानी BIS समय-समय पर ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स के गोदामों पर रेड करता रहा है। मार्च 2025 में एक बड़ी कार्रवाई में BIS ने ई-कॉमर्स वेबसाइट्स के गोदामों से 4,000 से ज्यादा नकली सामान जब्त किए थे। वहीं 2024-25 में 22 तलाशी और जब्ती अभियान चलाए गए। लेकिन सवाल ये है.
इतने छापों और जब्तियों के बावजूद नकली प्रोडक्ट्स कैसे लगातार ग्राहकों तक पहुँच रहे हैं. क्या इन ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर निगरानी पर्याप्त नहीं है. या फिर सप्लाई चेन में कहीं बहुत बड़ा छेद है सबसे ज्यादा नकली सामान लक्जरी ब्रांड्स के नाम पर बेचा जाता है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर असली और नकली प्रोडक्ट्स में फर्क करना ग्राहकों के लिए मुश्किल हो जाता है
सरकार को कड़े नियम और दंडात्मक कार्रवाई करनी होगी। साथ ही उपभोक्ताओं को भी सतर्क रहना होगा। जब तक ग्राहक सावधान नहीं होंगे, यह नकली मार्केट खत्म नहीं होगा। भारत में नकली सामान बेचने पर कानूनी सज़ा है, लेकिन ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के बढ़ते दायरे और हज़ारों सेलर्स की वजह से कार्रवाई बेहद मुश्किल हो जाती है।
अक्सर यह प्रोडक्ट्स छोटे गोदामों में पैक होते हैं और बड़े ब्रांड्स के नाम पर बेचे जाते हैं। कानून है, लेकिन क्रियान्वयन कमज़ोर है. और इसी वजह से फेक मार्केट दिन-ब-दिन मज़बूत हो रहा है। तो अगर आप ऑनलाइन शॉपिंग कर रहे हैं, तो इन बातों का ध्यान रखें, हमेशा ट्रस्टेड सेलर से ही खरीदें।
प्रोडक्ट का रिव्यू और रेटिंग चेक करें। प्रोडक्ट मिलने पर QR Code या Serial Number वेरिफाई करें, और अगर प्रोडक्ट नकली लगे, तो तुरंत National Consumer Helpline पर शिकायत दर्ज करें। ऑनलाइन शॉपिंग आसान है, लेकिन इस आसानी के पीछे छिपा है
एक बड़ा धोखा। हर साल लाखों उपभोक्ता नकली सामान का शिकार बनते हैं और यह कारोबार अरबों में चलता है। तो सवाल साफ है क्या सरकार और ई-कॉमर्स कंपनियां मिलकर इस नकली बाज़ार को रोक पाएंगी, या फिर ग्राहकों को ही जागरूक होकर अपनी सुरक्षा खुद करनी होगी क्योंकि अगर खरीदार सावधान है, तभी असली और नकली का फर्क बचेगा।
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