
लखनऊ। इतिहास रचकर लौटे भारतीय अंतरिक्ष यात्री ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला का सोमवार को उनके गृहनगर लखनऊ में अभूतपूर्व स्वागत हुआ। जैसे ही उनका विमान चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर उतरा, वहां मौजूद हजारों लोगों ने तालियों और नारों के बीच उनका अभिनंदन किया। एयरपोर्ट परिसर फूलों से सजाया गया था और ‘भारत माता की जय’ तथा ‘शुभांशु शुक्ला अमर रहें’ के जयघोष से वातावरण गूंज उठा।
एयरपोर्ट पर स्वागत का नज़ारा
एयरपोर्ट पर शुभांशु शुक्ला के माता-पिता, परिजन और करीबी मित्र पहले से मौजूद थे। उनके स्वागत के लिए उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी और लखनऊ की मेयर सुषमा खर्कवाल विशेष रूप से पहुंचे। जैसे ही शुभांशु एयरपोर्ट से बाहर निकले, उन पर पुष्प वर्षा की गई और पारंपरिक अंदाज़ में उनका स्वागत किया गया।
एयरपोर्ट से बाहर निकलते समय लोगों की भीड़ उन्हें देखने के लिए उमड़ पड़ी। वहां उपस्थित लोग ‘नेशनल हीरो शुभांशु’ के नारे लगा रहे थे। बच्चों और युवाओं में उत्साह चरम पर था, मानो उनका कोई अपना भाई या बेटा आसमान को छूकर लौटा हो।

रोड शो ने किया माहौल और खास
एयरपोर्ट से शुभांशु शुक्ला खुली जीप में सवार होकर रोड शो के लिए रवाना हुए। शहर की सड़कों पर जगह-जगह उनका स्वागत करने के लिए मंच बनाए गए थे। कई जगह लोगों ने ढोल-नगाड़ों के साथ जुलूस निकाला और फूल बरसाए।
रोड शो के दौरान उनका काफिला गोमतीनगर विस्तार स्थित CMS स्कूल की ओर बढ़ा, जहां से उन्होंने कभी अपनी पढ़ाई की थी। स्कूल प्रशासन ने उनके स्वागत के लिए विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया। सड़क के दोनों ओर लोग खड़े होकर हाथ हिला रहे थे और बच्चों ने उन्हें देखकर खुशी से झूमते हुए तिरंगे लहराए।
पूरे लखनऊ में जश्न का माहौल
लखनऊ नगर निगम ने शहरभर में शुभांशु शुक्ला के भव्य स्वागत की तैयारियां की थीं। चौक, हजरतगंज, गोमतीनगर और अलीगंज जैसे प्रमुख इलाकों में ‘शुभांशु – नेशनल हीरो’ लिखे पोस्टर और होर्डिंग लगाए गए। उनके पैतृक मोहल्ले त्रिवेणीनगर में तो खास उत्सव का माहौल रहा। स्थानीय लोगों ने घरों को सजाया, मिठाई बांटी और अपने गगनवीर पर गर्व जताया।
यही नहीं, त्रिवेणीनगर स्थित उनके घर तक जाने वाली सड़क का नाम बदलकर ‘शुभांशु शुक्ला मार्ग’ रख दिया गया। यह उनके लिए और उनके परिवार के लिए सम्मान का अनोखा क्षण था।
स्कूल पहुंचकर हुए भावुक
CMS गोमतीनगर विस्तार पहुंचने पर शुभांशु का छात्रों और शिक्षकों ने जबरदस्त स्वागत किया। मंच पर पहुंचते ही बच्चों ने तिरंगे और गुब्बारे लहराए। कई छात्र उनकी उपलब्धि से प्रेरित होकर उन्हें नायक की तरह देख रहे थे।
यह वही स्कूल है, जहां से शुभांशु ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की थी। अपने पुराने स्कूल में सम्मान पाकर वे खुद भी भावुक हो गए और मुस्कुराते हुए मंच पर छात्रों का अभिवादन स्वीकार किया।
शुभांशु शुक्ला का संबोधन
अपने सम्मान समारोह में शुभांशु शुक्ला ने जोश से भरा संबोधन दिया। उन्होंने शुरुआत प्रसिद्ध डायलॉग “हाऊ द जोश” से की, जिस पर पूरा हॉल ‘हाई सर’ के साथ गूंज उठा।
उन्होंने कहा –
“आज मेरे लिए बहुत डिफरेंट फीलिंग है। आप सबने जो कुछ किया उसके लिए मैं आभारी हूं।”
“मैं उतना टैलेंटेड नहीं हूं जितना आप लोग हैं। आप सब भी भविष्य में बहुत तरक्की करोगे।”
“पिछले एक साल से मैं लगातार काम कर रहा था और सही समय पर मुझे सही अपॉर्च्युनिटी मिली।”
“किसी ने यह नहीं पूछा कि अंतरिक्ष स्टेशन पर मैंने क्या किया। सबने यही पूछा कि आप एस्ट्रोनॉट कैसे बने।”
“मुझे बहुत सरप्राइज मिले और घर लौटकर अपार खुशी का अनुभव हो रहा है।”
उनके इन शब्दों पर छात्र-छात्राओं और उपस्थित अतिथियों ने तालियों की गड़गड़ाहट से उनका स्वागत किया।
एक ऐतिहासिक उपलब्धि
शुभांशु शुक्ला ने हाल ही में Axiom-4 मिशन के तहत अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) की 18 दिन की यात्रा पूरी कर इतिहास रचा। वे 1984 में राकेश शर्मा के बाद अंतरिक्ष में जाने वाले दूसरे भारतीय और ISS पर पहुंचने वाले पहले भारतीय बने।
इस उपलब्धि ने न केवल लखनऊ बल्कि पूरे भारत को गौरवान्वित किया है। जिस तरह से उनका स्वागत हुआ, उससे यह साफ है कि देश उन्हें एक प्रेरणा और राष्ट्रीय हीरो के रूप में देखता है।
डिप्टी सीएम और नेताओं ने जताया गर्व
इस मौके पर डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कहा – “यह हम सबके लिए गौरव का क्षण है। शुभांशु ने पूरे देश का नाम रोशन किया है और उनकी यह उपलब्धि नई पीढ़ी को प्रेरित करेगी।”
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी और मेयर सुषमा खर्कवाल ने भी शुभांशु के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए उन्हें सच्चा हीरो बताया।
लखनऊ का गौरव, देश का नायक
शुभांशु शुक्ला की इस यात्रा ने दिखा दिया कि मेहनत, लगन और अवसरों का सही उपयोग करके कोई भी शिखर तक पहुंच सकता है। उनकी वापसी पर लखनऊ का यह भव्य स्वागत सिर्फ उनके लिए नहीं था, बल्कि यह पूरे भारत के अंतरिक्ष सपनों और आकांक्षाओं का उत्सव था।
उनकी यात्रा ने हर उस युवा को प्रेरणा दी है जो विज्ञान, तकनीक और अंतरिक्ष की दुनिया में अपना भविष्य देखना चाहता है।