
फिरोजाबाद। मोनी आश्रम समिति, राजा का ताल फिरोजाबाद द्वारा सरदार भगत सिंह जी के जन्म दिवस पर एक विराट कवि सम्मेलन का आयोजन आश्रम प्रांगण में किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन चौकी इंचार्ज शैलेंद्र शर्मा और धर्मेंद्र यादव ने संयुक्त रूप से फीता काटकर किया।
कार्यक्रम की शुरुआत आगरा से आई कवयित्री मीना शर्मा ने मां शारदे की वंदना प्रस्तुत कर की – “मात शारदे ऐसा वर दे, अमन चैन की बारिश कर दे।” इसके बाद कवि राम लखन आशिक ने अपनी पंक्तियों से सियासत पर व्यंग्य किया – “कभी कसमें नहीं खाते, कभी वादा नहीं करते, सियासत की तरह हम, एक का आधा नहीं करते।”
कवि प्रमोद गोरेवाला ने संवेदनशील पंक्तियां पढ़ीं – “दूसरों की मुश्किलों पर मुस्कुराए हम, हमें गैरों की खुशियों में खुशी होना नहीं आया।” हास्य कवि मनोज राजताली ने अपने चुटीले व्यंग्यों से श्रोताओं को खूब गुदगुदाया और भगत सिंह के बलिदानों पर पढ़ा – “आजादी को समझ बपौती, अपनी धुन में ऐंठे हैं, पता नहीं वह भगत सिंह के बलिदानों पर बैठे हैं।”
वीर रस के कवि राम सनेही रजत ने कहा – “तिरंगा शान लिख देना, तिरंगा मान लिख देना, तुम वीर शहीदों की तिरंगा जान लिख देना।” वहीं बृजेश बाबू यादव ने कृष्ण महिमा का वर्णन करते हुए सुनाया – “सब ग्वालों के हैं बैरिस्टर, सखियों के हैं चीफ मिनिस्टर।”
श्रृंगार रस में कवयित्री मीना शर्मा ने प्रस्तुत किया – “बांसुरी की धुन पर राधे-राधे बोलकर, मोहन किशोरी जी के गीत गाया करते हैं।” ग़ज़लकार जीरो बांडवी ने कहा – “पड़ोसी से पड़ोसी का कनेक्शन हो भी सकता है, मोहब्बत करने वालों में इलेक्शन हो भी सकता है।”
गीतकार रविंद्र रंजन ने ब्रज की रसभरी छटा प्रस्तुत करते हुए पढ़ा – “जब-जब कन्हैया की बंसी बजी, ब्रज की हर गोपी बन राधा सजी।”
कार्यक्रम की अध्यक्षता आश्रम महंत जी ने की और संचालन हास्य कवि मनोज राजताली ने किया। इस अवसर पर विमला यादव, जोली यादव, राहुल, जयप्रकाश जी, रामगोपाल, भूरी सिंह कुशवाहा, विनोद, राकेश बाबू, बंटी कप्तान, संजय बघेल सहित अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे।
कार्यक्रम की सफलता पर आश्रम प्रबंधक प्रेम प्रकाश यादव ने सभी का आभार व्यक्त किया।