समय पर वेतन बना नए साल की सबसे बड़ी सौगात

बाराबंकी। जिले के मदरसों में कार्यरत शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए नया साल खुशियों और राहत की सौगात लेकर आया है। समय पर वेतन मिलने से न सिर्फ चेहरों पर सुकून दिखाई दे रहा है, बल्कि परिवार की जिम्मेदारियों को निभाने का आत्मविश्वास भी मजबूत हुआ है। जिले में मदरसों में कुल 339 कर्मचारी कार्यरत हैं, जिनमें 301 प्राथमिक व जूनियर शिक्षक, 19 लिपिक और 19 चपरासी शामिल हैं। इनमें सबसे अधिक 25 शिक्षक जैदपुर स्थित मदरसा जामिया अरबिया नूरुल उलूम में कार्यरत हैं।
समय से वेतन मिलने का सीधा असर शिक्षकों के जीवन पर पड़ा है। बैंक लोन की किस्तें समय पर जमा हो पा रही हैं, बच्चों की स्कूल फीस बिना चिंता के अदा हो रही है और घरेलू बजट भी संतुलित बना रह रहा है। महीने भर की मेहनत के बाद वक्त पर तनख्वाह मिलना शिक्षकों के लिए किसी राहत से कम नहीं है।
शिक्षकों का कहना है कि जून माह में जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी संजय मिश्रा के कार्यभार संभालने के बाद जुलाई से ही हर माह पहली या दूसरी तारीख को वेतन मिलना सुनिश्चित हो गया। इसी वजह से कर्मचारियों के बीच उनकी कार्यशैली की सराहना लगातार बढ़ रही है। सूरतगंज के शिक्षक हाफिज नईम ने बताया कि वेतन को लेकर अधिकारी की संवेदनशीलता यह दर्शाती है कि उन्हें कर्मचारियों की पारिवारिक जिम्मेदारियों और जरूरतों का पूरा एहसास है।
नए साल के पहले ही दिन जब शिक्षकों के खातों में वेतन पहुंचा तो खुशी की लहर दौड़ गई। व्हाट्सएप ग्रुपों पर शिक्षक और कर्मचारी जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी को बधाई, धन्यवाद और आभार संदेश भेजते नजर आए। शिक्षकों का कहना है कि पहली बार ऐसा महसूस हुआ कि उनकी मेहनत का सही सम्मान हो रहा है।
इस संबंध में जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी संजय मिश्रा ने कहा कि मेहनत करने वालों को उनकी कमाई समय पर मिलनी चाहिए। किसी को अपने हक के लिए इंतजार करना पड़े, यह स्वीकार्य नहीं है। समय पर वेतन देना कर्मचारियों का अधिकार है और इसे सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
समयबद्ध वेतन व्यवस्था ने न केवल शिक्षकों और कर्मचारियों का मनोबल बढ़ाया है, बल्कि प्रशासन और कर्मचारियों के बीच विश्वास की एक नई मिसाल भी कायम की है।