भारत–नेपाल सीमा पर स्वास्थ्य सेवाओं की सीएमओ ने की समीक्षा, थारू जनजाति को मिल रहा संस्थागत प्रसव का लाभ

लखीमपुर खीरी। भारत–नेपाल सीमा से सटे क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति का जायजा लेने के लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. संतोष गुप्ता ने बुधवार को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) चंदन चौकी एवं पलिया का स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता, उपलब्ध संसाधनों और व्यवस्थाओं की विस्तार से समीक्षा करते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान सीएमओ ने क्षेत्र में संचालित टीकाकरण अभियान की प्रगति की जानकारी ली और सीएचसी चंदन चौकी में आईपीडी (इन-पेशेंट डिपार्टमेंट) सेवाओं को और बेहतर करने के निर्देश दिए। उन्होंने यहां उपलब्ध ईसीजी सेवा पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि यह सुविधा दूरस्थ एवं वन क्षेत्र में रहने वाले लोगों के लिए अत्यंत लाभकारी है, जिससे हृदय संबंधी रोगों की समय रहते जांच और उपचार संभव हो पा रहा है।
सीएमओ डॉ. संतोष गुप्ता ने बताया कि चंदन चौकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भारत–नेपाल सीमा पर स्थित होने के कारण अत्यंत महत्वपूर्ण है। यहां न केवल भारतीय नागरिकों को बल्कि सीमा पार से आने वाले नेपाली नागरिकों को भी आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। जंगल क्षेत्र में निवास करने वाली थारू जनजाति को विशेष रूप से संस्थागत प्रसव की सुविधा दी जा रही है, जिससे मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाई जा सके। इसके साथ ही जननी सुरक्षा योजना (जेएसवाई) के अंतर्गत गर्भवती महिलाओं को आर्थिक सहायता भी प्रदान की जा रही है।
निरीक्षण के दौरान सीएमओ ने सीएचसी चंदन चौकी पर दंत सेवाएं शुरू करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि सप्ताह में एक दिन, प्रत्येक शनिवार को दंत रोग विशेषज्ञ की ड्यूटी लगाई जाए, ताकि क्षेत्रीय लोगों को दांतों से संबंधित रोगों के इलाज के लिए बाहर न जाना पड़े।
इसके बाद सीएमओ ने सीएचसी पलिया का निरीक्षण किया। उन्होंने इमरजेंसी कक्ष, औषधि कक्ष, ओपीडी, टीकाकरण कक्ष, कोल्ड चैन रूम और वार्डों का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। साफ-सफाई व्यवस्था पर संतोष व्यक्त करते हुए उन्होंने ठंड के मौसम को ध्यान में रखते हुए रूम हीटर और ब्लोअर की उपलब्धता को जरूरी बताया।
सीएमओ ने सीएचसी अधीक्षक डॉ. भरत सिंह को निर्देश दिए कि शीतलहर के दृष्टिगत रैन बसेरों का नियमित भ्रमण किया जाए तथा अलाव की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित कराई जाए, जिससे ठंड के मौसम में इलाज के लिए आने वाले मरीजों और उनके तीमारदारों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती और दूरस्थ क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है।