
लखीमपुर खीरी। सरकार की अनुकंपा नियुक्ति और पारिवारिक पेंशन जैसी जनकल्याणकारी योजनाएं कागजों में भले ही सरल दिखाई देती हों, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग नजर आ रही है। सदर तहसील क्षेत्र के ग्राम छाउछ का एक मामला प्रशासनिक लापरवाही और संवेदनहीनता की तस्वीर पेश करता है, जहां एक पुलिसकर्मी की पत्नी को पति की मृत्यु के बाद भी जरूरी प्रमाण पत्रों के लिए लगातार संघर्ष करना पड़ रहा है।
ग्राम छाउछ के मोहल्ला धीरज नगर कॉलोनी निवासी लक्ष्मी देवी के पति स्वर्गीय अनिल कुमार शर्मा पुलिस विभाग में एसपी कार्यालय, सीतापुर में तैनात थे। 13 अगस्त 2025 को उनके आकस्मिक निधन के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। शासन के नियमानुसार लक्ष्मी देवी को अनुकंपा नियुक्ति, पारिवारिक पेंशन और अन्य विभागीय लाभ मिलने चाहिए, लेकिन निवास और आय प्रमाण पत्र न बनने के कारण पूरी प्रक्रिया ठप पड़ी है।
पीड़िता का आरोप है कि उन्होंने निवास और आय प्रमाण पत्र बनवाने के लिए अब तक तीन बार आवेदन किया, लेकिन हर बार संबंधित लेखपाल अजीत कुमार द्वारा बिना स्पष्ट कारण बताए आवेदन खारिज कर दिया गया। जब कारण पूछे गए तो कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला, जिससे उन्हें मानसिक और आर्थिक परेशानी झेलनी पड़ रही है। लक्ष्मी देवी का कहना है कि वर्ष 25 अगस्त 2021 को उनके नाम से निवास प्रमाण पत्र पहले ही जारी हो चुका है, केवल तकनीकी कारणों से उस समय आधार संशोधन नहीं हो सका था। वर्तमान में आधार संशोधन और शासकीय कार्यों के लिए नए प्रमाण पत्र आवश्यक हैं, इसके बावजूद आवेदन निरस्त किया जाना समझ से परे है।
पीड़िता के अनुसार उनके पास पति का मृत्यु प्रमाण पत्र, ग्राम प्रधान द्वारा जारी निवास प्रमाण पत्र, उत्तराधिकार प्रमाण पत्र सहित सभी आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध हैं। इसके बाद भी प्रमाण पत्र न बनना लापरवाही और मनमानी को दर्शाता है। लगातार अनदेखी से परेशान होकर लक्ष्मी देवी ने मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराते हुए पूरे मामले की जांच और शीघ्र कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते प्रमाण पत्र जारी नहीं हुए तो अनुकंपा नियुक्ति की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
मामले को लेकर लेखपाल संघ के अध्यक्ष शैलेंद्र मिश्रा ने बताया कि उन्हें प्रकरण की जानकारी मिली है और तथ्यों की जांच की जा रही है। यदि आरोप सही पाए गए तो दस्तावेज बनाए जाएंगे। वहीं एसडीएम सदर अश्विनी कुमार ने कहा कि प्रार्थना पत्र सभी दस्तावेजों के साथ कार्यालय में प्रस्तुत किया जाए, आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
यह मामला शासन के उन दावों पर सवाल खड़े करता है, जिनमें विधवाओं और आश्रितों को समयबद्ध सरकारी लाभ देने की बात कही जाती है। जब एक पुलिसकर्मी के परिवार को ही समय पर न्याय और सहायता नहीं मिल पा रही है, तो आम नागरिकों की स्थिति का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।