बहराइच। जिले को झकझोर देने वाले नर बलि कांड में अदालत ने कड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए आरोपी को फांसी की सजा सुनाई है। अंधविश्वास के चलते तांत्रिक की बातों में आकर अपने ही दस वर्षीय चचेरे भाई की निर्मम हत्या करने वाले आरोपी अनूप वर्मा को बहराइच की चतुर्थ अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने दोषी करार दिया है।
यह जघन्य घटना करीब तीन वर्ष पूर्व कोतवाली नानपारा क्षेत्र में सामने आई थी। अभियोजन के अनुसार, आरोपी अनूप वर्मा अपने दो वर्षीय बेटे की बीमारी को लेकर अंधविश्वास में फंसा हुआ था। तांत्रिक की सलाह पर उसने नर बलि देने का निश्चय किया और मासूम बच्चे को बहला-फुसलाकर खेत में ले गया। वहां उसने बच्चे की गर्दन काटकर निर्मम हत्या कर दी। इस हृदयविदारक घटना से पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई थी और लोगों में आक्रोश व्याप्त हो गया था।
मामले की विवेचना के दौरान पुलिस ने साक्ष्य संकलन कर आरोपी के खिलाफ मजबूत चार्जशीट दाखिल की। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने ठोस साक्ष्य, परिस्थितिजन्य प्रमाण और गवाहों के बयान प्रस्तुत किए, जिससे यह सिद्ध हो गया कि हत्या पूरी तरह योजनाबद्ध थी और अंधविश्वास के चलते की गई थी। बचाव पक्ष के तर्क अदालत को संतुष्ट नहीं कर सके।
सभी तथ्यों और साक्ष्यों पर गहन विचार करने के बाद अदालत ने इसे ‘दुर्लभतम से दुर्लभ’ श्रेणी का अपराध मानते हुए आरोपी अनूप वर्मा को फांसी की सजा सुनाई। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि इस प्रकार का अमानवीय कृत्य समाज की अंतरात्मा को झकझोर देता है और ऐसे अपराधों के प्रति कठोर संदेश देना आवश्यक है।
अदालत के फैसले के बाद पीड़ित परिवार को कुछ हद तक न्याय मिलने की अनुभूति हुई है। वहीं, आमजन में भी यह संदेश गया है कि कानून अंधविश्वास के नाम पर किए गए जघन्य अपराधों को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं करेगा। यह निर्णय समाज में फैले अंधविश्वास के खिलाफ एक सख्त चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है और यह स्पष्ट करता है कि कानून की नजर में मानव जीवन सर्वोपरि है।