
बाराबंकी। युवाओं को आत्मविश्वासी बनकर अपने लक्ष्य के प्रति अडिग रहने और जीवन को महान उद्देश्य के लिए समर्पित करने की प्रेरणा देने वाले स्वामी विवेकानंद जी की 163वीं जयंती पूर्व दिवस पर श्रद्धा और विचारों के साथ स्मरण किया गया। शहर के प्राचीन नागेश्वरनाथ मंदिर प्रांगण में आयोजित 9वें श्रद्धा अर्पण कार्यक्रम में बड़ी संख्या में बुद्धिजीवी वर्ग एकत्रित हुआ और स्वामी विवेकानंद के विचारों को आत्मसात करने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि डॉ. टी. एन. वर्मा ने स्वामी विवेकानंद जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर किया। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि राकेश शुक्ला ‘दीपक’ सहित उपस्थित बुद्धिजीवियों ने भी पुष्प अर्पित कर श्रद्धा-सुमन अर्पित किए। मुख्य अतिथि डॉ. टी. एन. वर्मा ने कहा कि स्वामी विवेकानंद धरती पर देवदूत के समान थे। उन्होंने युवाओं को जागृत करते हुए कहा—“खुद को कमजोर मत समझो, तुम असीमित शक्ति के स्रोत हो। उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए।”
विशिष्ट अतिथि राकेश शुक्ला ‘दीपक’ ने स्वामी विवेकानंद के विचारों को साझा करते हुए कहा कि स्वामी जी मानते थे, “जिस दिन आपके सामने समस्याएं आनी बंद हो जाएं, समझ लीजिए आप गलत रास्ते पर चल रहे हैं।” उन्होंने युवाओं से चुनौतियों को अवसर के रूप में स्वीकार करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में वरिष्ठ समाजसेवी टी. एन. वर्मा ने कहा कि जो कुछ भी व्यक्ति को शारीरिक, बौद्धिक या मानसिक रूप से कमजोर बनाता है, उसे जहर की तरह त्याग देना चाहिए। स्वामी विवेकानंद का संदेश था—“जब तक जीना है, तब तक सीखना है।” उन्होंने यह भी कहा कि विचार कभी नहीं मरते, वे पीढ़ियों तक मार्गदर्शन करते हैं।
कार्यक्रम के दौरान मिष्ठान वितरण एवं कैलेंडर वितरण किया गया। जयंती के अवसर पर स्वामी विवेकानंद के सम्मान में पौधरोपण भी किया गया। पौधरोपण करने वालों में पत्रकार गोविन्द वर्मा, आयोजक दिनेश चंद्र श्रीवास्तव, उमेश चंद्र यादव, नित्यानंद तिवारी, हिमांशु वर्मा, श्रीश द्विवेदी, प्रेम वर्मा, मनीष सिंह, केशव शुक्ला, राजेश गुप्ता, काशी गुप्ता सहित अन्य बुद्धिजीवीगण शामिल रहे।