
मसौली, बाराबंकी। ग्राम पंचायत नैनामऊ में आयोजित श्रीराम कथा के तीसरे दिन श्रद्धालु भक्ति रस में डूबे नजर आए। कथावाचक पंडित महेंद्र मृदुल ने महर्षि सुखदेव और शिव–पार्वती की अमर कथा का भावपूर्ण वर्णन कर उपस्थित भक्तों को भावविभोर कर दिया। कथा स्थल पर “हरि बोल” और “जय श्रीराम” के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो उठा।
कथावाचक ने बताया कि जब भगवान शिव माता पार्वती को अमर कथा सुना रहे थे, तब एक तोता बीच-बीच में हुकारी भरता था। यह देखकर शिवजी को शंका हुई और उन्होंने त्रिशूल से उसका पीछा किया। भयभीत तोता भागकर महर्षि वेदव्यास के आश्रम में पहुंचा और उनकी पत्नी के गर्भ में प्रवेश कर गया, जहां वह 12 वर्षों तक रहा। भगवान श्रीकृष्ण के आश्वासन के बाद वह गर्भ से बाहर निकला। जन्म लेते ही वह संसार से विरक्त होकर वन की ओर चल पड़ा, लेकिन वेदव्यास के आग्रह पर उसने श्रीमद्भागवत का ज्ञान प्राप्त किया और आगे चलकर राजा परीक्षित को भागवत कथा सुनाई।
पंडित महेंद्र मृदुल ने आगे बताया कि महर्षि सुखदेव ने महान ज्ञानी राजा जनक को अपना गुरु स्वीकार किया था। महर्षि वेदव्यास ने अपने पुत्र शुकदेव को ज्ञान और वैराग्य की पराकाष्ठा प्राप्त करने के लिए राजा जनक के पास भेजा था। राजा जनक ने शुकदेव की विभिन्न परीक्षाएं लीं और दीक्षा दी। इन परीक्षाओं के माध्यम से शुकदेव ने राजा जनक के गहन वैराग्य और आत्मज्ञान को जाना और अंततः उन्हें अपना गुरु स्वीकार किया।
कथा के दौरान श्रद्धालु कथा श्रवण में लीन रहे। इस अवसर पर विशाल वर्मा, रामदेव वर्मा, अनीस, अतुल, पिंटू, हंसराज, धीरज, नितिन कुमार सहित बड़ी संख्या में भक्तगण उपस्थित रहे।