
बहराइच। जिले के जरवल क्षेत्र स्थित ग्राम कंजिया के उपकेंद्र पर आयोजित स्वास्थ्य मेले में ग्रामीणों की भारी भीड़ उमड़ी। मोबियस फाउंडेशन, स्वास्थ्य विभाग एवं उम्मीद परियोजना के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस स्वास्थ्य मेले का मुख्य उद्देश्य ग्रामीणों को निःशुल्क स्वास्थ्य जांच, चिकित्सकीय परामर्श तथा मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य योजनाओं से जोड़ना रहा। मेले में कुल 390 से अधिक लाभार्थियों ने विभिन्न स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाया।
स्वास्थ्य मेले के दौरान 532 लोगों का पंजीकरण किया गया। परिवार नियोजन से संबंधित सेवाओं के अंतर्गत 69 दंपतियों को परामर्श प्रदान किया गया तथा आवश्यक साधन भी उपलब्ध कराए गए। किशोर-किशोरियों की भी सक्रिय सहभागिता देखने को मिली, जिसमें 35 किशोर-किशोरियों ने स्वास्थ्य जागरूकता सत्रों में भाग लिया। इसके अतिरिक्त 66 प्रतिभागियों ने खेल प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया, 37 लोगों के आयुष्मान भारत कार्ड बनाए गए तथा 167 लाभार्थियों को निःशुल्क दवाओं का वितरण किया गया।
मेले में उपस्थित आरबीएसके से डॉ. अशोक कुमार ने विवाह की सही उम्र के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि लड़कियों के लिए 18 वर्ष एवं लड़कों के लिए 21 वर्ष की आयु स्वास्थ्य और कानूनी दृष्टि से अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि बाल विवाह एक गंभीर अपराध है, जिसका प्रतिकूल प्रभाव मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य पर पड़ता है। कम उम्र में गर्भधारण से एनीमिया, प्रसव संबंधी जटिलताएं, कम वजन के शिशु का जन्म एवं कुपोषण का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने दो गर्भधारण के बीच कम से कम तीन वर्ष का अंतर रखने की सलाह दी।
पीएफआई टीम से डॉ. सफिया ज़मीर ने कहा कि परिवार नियोजन केवल बच्चों की संख्या सीमित करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सुरक्षा की एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। उन्होंने बताया कि 20 वर्ष की आयु के बाद गर्भधारण एवं बच्चों के बीच उचित अंतर रखने से महिलाओं को एनीमिया एवं अन्य जटिलताओं से बचाया जा सकता है।
स्वास्थ्य मेले के सफल आयोजन से ग्रामीणों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ी है और सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं से जुड़ने को लेकर सकारात्मक माहौल बना है।