
जरवल रोड, बहराइच।घाघरा नदी पर स्थित ऐतिहासिक संजय सेतु की मरम्मत के दौरान क्षेत्रवासियों को केवल वैकल्पिक यातायात सुविधा ही नहीं मिलेगी, बल्कि वे एक बार फिर सत्तर के दशक की यादों से रूबरू होंगे। मरम्मत कार्य के चलते यातायात को सुचारू बनाए रखने के उद्देश्य से प्रशासन द्वारा पीपे का अस्थायी पुल तैयार किया जाएगा, जो कभी घाघरा नदी पार करने का प्रमुख साधन हुआ करता था।
यह पीपे का पुल केवल एक अस्थायी व्यवस्था नहीं, बल्कि अतीत और वर्तमान को जोड़ने वाली एक जीवंत कड़ी होगा। वर्ष 1982–83 के दौर में जब लोग इसी तरह के पीपे के पुल से घाघरा पार करते थे, वही अनुभव अब आधुनिक सुरक्षा मानकों और प्रशासनिक निगरानी के साथ दोबारा देखने को मिलेगा।
मरम्मत अवधि के दौरान संजय सेतु पर यातायात प्रभावित न हो, इसके लिए बनाए जाने वाले इस अस्थायी पुल से पैदल यात्रियों, दुपहिया वाहनों, मोटर कारों, स्कूल वैन तथा एम्बुलेंस जैसी आपातकालीन सेवाओं का आवागमन निर्बाध रूप से जारी रहेगा। इससे स्थानीय नागरिकों, मरीजों, विद्यार्थियों और व्यापारिक गतिविधियों पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा।
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार पीपे के पुल का संचालन नियंत्रित क्षमता और पूर्ण सुरक्षा व्यवस्था के तहत किया जाएगा। यातायात नियंत्रण, निगरानी और आवश्यक सुरक्षा इंतज़ाम सुनिश्चित किए जाएंगे, ताकि किसी भी प्रकार की असुविधा या जोखिम से बचा जा सके।
स्थानीय लोगों के लिए यह पुल सुविधा और भावनाओं का संगम साबित होगा, जहां एक ओर दैनिक जरूरतें पूरी होंगी, वहीं दूसरी ओर घाघरा की लहरों पर तैरता यह पुल बीते दौर की यादों को फिर से जीवंत कर देगा। संजय सेतु की मरम्मत के बीच प्रस्तावित यह पीपे का पुल इतिहास और वर्तमान को जोड़ने वाला एक अनोखा प्रतीक बनकर सामने आएगा।