
रिपोर्ट – पंकज चतुर्वेदी
रामनगर बाराबंकी। आस्था और श्रद्धा से परिपूर्ण धार्मिक यात्रा पर निकले रामनगर के पांच सदस्यीय श्रद्धालुओं का जत्था प्रमुख तीर्थ स्थलों के दर्शन करता हुआ आध्यात्मिक अनुभूति से सराबोर रहा। इस यात्रा में प्रमुख रूप से डा. पंकज चतुर्वेदी (पत्रकार), डा. राजीव अवस्थी, संत कुमार उपाध्याय (एड.), शिवकरन यादव और कल्लू शामिल रहे, जिन्होंने पूरे मार्ग में भक्ति और अनुशासन का परिचय दिया।
यात्रा का क्रम व्यवस्थित रूप से तय किया गया था। श्रद्धालु पहले जयपुर पहुंचे, जहां रविवार शाम रानी मृणालनिनी सिंह की पुत्री के विवाह समारोह में शामिल होकर सामाजिक दायित्व निभाया। इस भव्य वैवाहिक कार्यक्रम में कई प्रमुख नेता और अधिकारी भी मौजूद रहे। जयपुर से ही आगे की धार्मिक यात्रा का शुभारंभ हुआ। सोमवार प्रातः श्रद्धालु जयपुर से सीकर मार्ग होते हुए खाटू श्याम मंदिर पहुंचे। खाटू श्याम जी को कलियुग के भगवान के रूप में पूजा जाता है और मान्यता है कि सच्चे मन से की गई प्रार्थना यहां अवश्य फलित होती है। मंदिर में दर्शन के दौरान श्रद्धालुओं ने विशेष पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना की।
इसके बाद जत्था सीकर से चूरू मार्ग पर स्थित सालासर बालाजी मंदिर पहुंचा। सालासर बालाजी धाम भगवान हनुमान के सिद्ध पीठों में गिना जाता है, जहां दूर-दूर से भक्त अपनी मनोकामनाएं लेकर आते हैं। यहां भी श्रद्धालुओं ने विधिवत पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
सालासर से यात्रा आगे बढ़ते हुए दल जयपुर की ओर वापस लौटा और वहां से दौसा मार्ग होते हुए देर रात मेहंदीपुर बालाजी मंदिर पहुंचा। यह धाम अपनी अद्भुत धार्मिक मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध है, जहां बालाजी महाराज के साथ प्रेतराज सरकार और भैरव बाबा की पूजा का विशेष महत्व है। मान्यता है कि यहां दर्शन करने से नकारात्मक शक्तियों और बाधाओं से मुक्ति मिलती है।
रात्रि विश्राम के पश्चात मंगलवार सुबह श्रद्धालुओं ने मेहंदीपुर बालाजी महाराज के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और अपनी यात्रा को पूर्ण किया। पूरी यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन, जयकारों और सामूहिक प्रार्थना के माध्यम से भक्ति का वातावरण बनाए रखा।
श्रद्धालुओं ने बताया कि यह यात्रा न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रही, बल्कि सामाजिक समरसता और आपसी जुड़ाव का भी प्रतीक बनी। खाटू श्याम, सालासर बालाजी और मेहंदीपुर बालाजी जैसे पावन धामों के दर्शन कर उन्हें आत्मिक शांति, ऊर्जा और नई प्रेरणा प्राप्त हुई।