
कुशीनगर। भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा पर हुए ऑपरेशन सिंदूर में अदम्य साहस और असाधारण बहादुरी का परिचय देने वाले कुशीनगर के लाल सहायक कमांडेंट अभिषेक श्रीवास्तव को स्वतंत्रता दिवस पर वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उनकी वीरता के इस कार्य ने न केवल जवानों और पोस्ट कमांडर की जान बचाई, बल्कि पूरे क्षेत्र को गौरवान्वित कर दिया।
मूलतः जौरा बाजार निवासी और पथरदेवा इंटर कॉलेज के पूर्व प्रिंसिपल रहे विजय लाल श्रीवास्तव के पुत्र अभिषेक श्रीवास्तव तैनाती के दौरान खार कोल चौकी पर ड्यूटी कर रहे थे। बीते 10 मई को तड़के चौकी पर अचानक आसमान में कई पाकिस्तानी ड्रोन दिखाई दिए। इस पर चौकी पर मौजूद बीएसएफ जवान तुरंत सतर्क हो गए और एसआई मोहम्मद इम्तियाज की कमान में एक ड्रोन मार गिराया गया।
ड्रोन से गिरे मोर्टार सेल में हुए भीषण धमाके में हेड कांस्टेबल बृज मोहन सिंह, कांस्टेबल देपेश्वर वर्मन, भूपेंद्र बाजपेई, राजन कुमार और वसव राज गंभीर रूप से घायल हो गए। धमाके से चौकी का माहौल तनावपूर्ण हो गया और सभी की जान खतरे में थी। इसी बीच, प्रशिक्षण पर तैनात अभिषेक श्रीवास्तव ने अपनी जान की परवाह किए बिना बंकर से बाहर निकलकर घायलों और पोस्ट कमांडर को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। उनकी इस त्वरित सूझबूझ और बहादुरी से कई जवानों की जान बच गई।
इस अदम्य साहस और वीरता को देखते हुए स्वतंत्रता दिवस समारोह में उन्हें वीरता पुरस्कार प्रदान किया गया। समारोह में 5 अधिकारियों को विशिष्ट सेवा राष्ट्रपति पदक और 46 को मेधावी सेवा पदक भी दिए गए, लेकिन अभिषेक का साहसिक योगदान सबसे अलग रहा।
अभिषेक को वीरता पुरस्कार मिलने की खबर से उनके पैतृक गांव जौरा बाजार और पूरे कुशीनगर जिले में हर्ष की लहर है। विधायक सुरेंद्र सिंह कुशवाहा, उच्च न्यायालय के अधिवक्ता पवन उपाध्याय, परिजन मनोज लाल श्रीवास्तव, कृष्णदेव लाल श्रीवास्तव, दीपक श्रीवास्तव, प्रधान प्रतिनिधि शंभू कुशवाहा सहित क्षेत्र के लोगों ने गर्व और खुशी जाहिर की है।
लोगों का कहना है कि अभिषेक की बहादुरी आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है और उनका यह योगदान हमेशा याद रखा जाएगा।