रिपोर्ट: दिलीप यादव
मथुरा। इस वर्ष खेती-किसानी पर संकट गहराता नजर आ रहा है। आलू की मंदी से शुरू हुई किसानों की परेशानी अब सब्जी और गेहूं तक पहुंच गई है। लगातार बेमौसम बारिश, आंधी-तूफान और ओलावृष्टि के चलते तीन प्रमुख फसलें बुरी तरह प्रभावित हुई हैं, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति चरमरा गई है।
अड़ींग निवासी किसान शेखर गुप्ता बताते हैं कि उनकी पूरे साल की योजना खेती पर आधारित रहती है, लेकिन इस बार हर फसल में नुकसान ही हाथ लगा है। पहले आलू के दाम गिर गए, फिर अगेती सब्जी की फसलें आंधी और ओलों की भेंट चढ़ गईं। अब गेहूं की फसल पर लगातार पड़ रही मौसम की मार से दाने अंकुरित होने और काले पड़ने का खतरा बढ़ गया है।
गांव मुडसेरस के किसान जगदीश का कहना है कि खेती से जुड़ा सारा अनुभव और विज्ञान इस बार बेअसर साबित हो रहा है। कभी बाजार में उचित मूल्य नहीं मिलता तो कभी मौसम फसलों को चौपट कर देता है। गेहूं की हालत देखकर किसानों में गहरी चिंता है।
नगला शेरा के प्रगतिशील किसान शिवराम चौधरी के अनुसार गेहूं की फसल पहले ही खरपतवार की समस्या से जूझ रही थी। कई बार दवा छिड़कने के बावजूद ‘गेहूं का मामा’ नामक खरपतवार नहीं खत्म हुआ, जिससे 30 से 40 प्रतिशत उत्पादन प्रभावित हुआ। अब बारिश और ओलावृष्टि ने दानों की गुणवत्ता को भी खराब करने की आशंका बढ़ा दी है।
वरिष्ठ अधिवक्ता धीरेन्द्र चौधरी का कहना है कि फसल बीमा योजना के बावजूद किसानों को राहत नहीं मिल पाती। बीमा कंपनियां प्रशासनिक रिपोर्ट, मौसम विभाग के आंकड़े और टोल फ्री नंबर पर शिकायत जैसी प्रक्रियाओं में किसानों को उलझा देती हैं, जिससे अधिकांश किसान लाभ से वंचित रह जाते हैं। इसके अलावा कई क्षेत्रों में जमीनें कालोनाइजरों और कारोबारियों के पास होने के कारण उन पर खेती करने वाले किसानों को न बीमा मिलता है और न ही सरकारी सहायता।
कुल मिलाकर इस साल आलू, सब्जी और गेहूं—तीनों फसलें मौसम और बाजार की मार की शिकार हुई हैं, जिससे किसानों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।