UP के बिजली-कर्मियों का प्रदेशव्यापी प्रदर्शन: दमनात्मक कार्रवाइयों पर सख्त चेतावनी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में विद्युत कर्मचारियों ने सोमवार को पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन के खिलाफ जोरदार विरोध दर्ज कराया। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के आह्वान पर प्रदेश के सभी जनपदों में कर्मचारियों, जूनियर इंजीनियरों, अभियंताओं और संविदा कर्मियों ने सभाएं आयोजित कर उत्पीड़नात्मक कार्रवाइयों के खिलाफ आवाज उठाई।

क्या है मांगे

समिति ने पावर कॉरपोरेशन अध्यक्ष को पत्र भेजकर मार्च 2023 की हड़ताल के बाद की गई सभी दमनात्मक कार्रवाइयों जैसे निष्कासन, एफआईआर, निलंबन और वेतन रोकने को तत्काल वापस लेने की मांग की। साथ ही निजीकरण के विरोध में चल रहे शांतिपूर्ण आंदोलनों पर हो रही कार्रवाई, जबरन स्थानांतरण, छंटनी और फेशियल अटेंडेंस के नाम पर वेतन रोकने जैसे कदमों को बंद करने की मांग की गई।

वहीं कर्मचारियों ने मई 2025 के संशोधित अनुशासनात्मक आदेशों को निरस्त करने, वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग के नाम पर पदों में कटौती रोकने तथा जबरन स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया समाप्त करने की भी मांग उठाई।

निजीकरण के प्रयास किसी भी हालत में नहीं स्वीकार

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने चेतावनी दी कि यदि 11 अप्रैल 2026 तक मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं हुआ, तो लखनऊ में बैठक कर प्रदेशव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा। साथ ही 1 अप्रैल 2026 से प्रस्तावित किसी भी निलंबन के विरोध में तत्काल सामूहिक सत्याग्रह की घोषणा की गई। कर्मचारियों ने दोहराया कि वे प्रदेश में निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए प्रतिबद्ध हैं, लेकिन उत्पीड़न और निजीकरण के प्रयास किसी भी हालत में स्वीकार नहीं किए जाएंगे।