योगी सरकार में चमकी आजमगढ़ की पहचान: निजामाबाद की ब्लैक पॉटरी को मिला वैश्विक सम्मान

लखनऊ। उत्तर प्रदेश का आज़मगढ़ जनपद अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक शिल्पकला के लिए देश-विदेश में प्रसिद्ध है। विशेष रूप से निज़ामाबाद क्षेत्र की ब्लैक पॉटरी (काली मिट्टी की कारीगरी) ने अपनी अनूठी पहचान बनाते हुए वैश्विक स्तर पर अलग मुकाम हासिल किया है। इस कला में प्रयुक्त विशेष प्रकार की चिकनी मिट्टी स्थानीय स्तर पर ही उपलब्ध होती है, जो इसे और भी विशिष्ट बनाती है। यही कारण है कि यहां निर्मित उत्पाद न केवल उपयोगी होते हैं, बल्कि अपनी आकर्षक बनावट और सौंदर्य के कारण लोगों को खासा आकर्षित करते हैं।

निजामाबाद क्षेत्र में 200 से अधिक कारीगर इस पारंपरिक शिल्प से जुड़े हुए हैं, जो अपने हुनर से फूलदान, बर्तन, चायदान, शक्करदान और विभिन्न सजावटी वस्तुएँ तैयार करते हैं। इन उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है और अब ये केवल देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी निर्यात किए जा रहे हैं। इस उद्योग ने स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा किए हैं और जिले की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। कृषि के साथ-साथ यह प्राचीन शिल्प उद्योग आज़मगढ़ की आर्थिक मजबूती का एक अहम आधार बन चुका है।

बाजार में अपनी अलग पहचान

ब्लैक पॉटरी की सबसे खास विशेषता इसका गहरा काला रंग और उस पर की जाने वाली बारीक नक्काशी है। कारीगर पहले बर्तनों को मिट्टी और वनस्पति के घोल में डुबोकर उनका आधार रंग तैयार करते हैं, फिर विशेष तकनीक से उन्हें पकाया जाता है। इसके बाद पारा, रांगा और सीसा जैसे तत्वों की मदद से उन्हें आकर्षक चमक प्रदान की जाती है। इस प्रक्रिया के कारण तैयार उत्पाद बेहद चमकदार और टिकाऊ बनते हैं, जो बाजार में अपनी अलग पहचान रखते हैं।

कुम्हार समुदाय द्वारा बनाए जाने वाले मिट्टी के बर्तन और देवी-देवताओं की प्रतिमाएं जैसे गणेश, लक्ष्मी, शिव, दुर्गा और सरस्वती-मेलों और त्योहारों के दौरान विशेष रूप से लोकप्रिय रहती हैं। इन कलाकृतियों में पारंपरिक आस्था और उत्कृष्ट कारीगरी का सुंदर संगम देखने को मिलता है, जो इस शिल्प को सांस्कृतिक रूप से और भी समृद्ध बनाता है।

‘एक जिला एक उत्पाद’ योजना

प्रदेश सरकार द्वारा इस पारंपरिक कला को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रयास भी उल्लेखनीय हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में ‘एक जिला एक उत्पाद’ योजना के तहत आज़मगढ़ की ब्लैक पॉटरी को नई पहचान और व्यापक बाजार मिला है। इस योजना के माध्यम से कारीगरों को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और बेहतर विपणन के अवसर प्राप्त हो रहे हैं, जिससे उनकी आय में निरंतर वृद्धि हो रही है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिल चुकी है पहचान

निज़ामाबाद के ब्लैक पॉटरी फाउंडेशन के निदेशक संजय कुमार यादव के अनुसार, सरकार की पहल से उन्हें कॉमन फैसिलिटी सेंटर (CFC) की सुविधा मिली है, जिसने उनके व्यापार को नई गति दी है। आधुनिक मशीनों की उपलब्धता के कारण अब कारीगर समय पर और बेहतर गुणवत्ता के साथ अपने ऑर्डर पूरे कर पा रहे हैं। उन्होंने बताया कि ODOP योजना के चलते ब्लैक पॉटरी को राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिल चुकी है।

कारीगरों के व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि

कॉमन फैसिलिटी सेंटर की स्थापना से उत्पादन प्रक्रिया काफी सरल हो गई है। यहां कच्चे माल से लेकर आधुनिक मशीनों तक सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हैं, जिससे कारीगर आसानी से अपने उत्पाद तैयार कर उन्हें पैक कर बाजार में बेच सकते हैं। इस व्यवस्था के चलते बड़े ऑर्डर भी समय पर पूरे किए जा रहे हैं और कारीगरों के व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिल रही है।

इस तरह आज़मगढ़ की यह पारंपरिक कला न केवल अपनी सांस्कृतिक विरासत को संजोए हुए है, बल्कि आधुनिक समय के साथ तालमेल बिठाते हुए विकास के नए आयाम भी स्थापित कर रही है। प्रदेश सरकार के निरंतर प्रयासों से यह अनमोल धरोहर आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित और समृद्ध रूप में पहुंचने की दिशा में अग्रसर है।