
बेहजम/लखीमपुर खीरी। जनपद खीरी के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बेहजम में आशा कार्यकर्ताओं के भुगतान में कथित हेराफेरी और बिल-बाउचर से छेड़छाड़ का गंभीर मामला सामने आया है, जो अब जनचर्चा का विषय बना हुआ है। आरोप है कि बीते कई वर्षों से सीएचसी बेहजम में तैनात अधीक्षक डॉ. अनिल वर्मा के संरक्षण में मुख्यमंत्री की जीरो टॉलरेंस नीति को खुलेआम ठेंगा दिखाया जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, पहले आशा कार्यकर्ताओं के भुगतान में कटौती की जाती है और बाद में सबूत मिटाने के लिए उनके बिल-बाउचर में कथित रूप से छेड़छाड़ की जाती है। इसी कड़ी में एक ताजा मामला सामने आया, जब सीएचसी बेहजम की पहली मंजिल पर बने आशा रिकॉर्ड रूम का ताला टूटा हुआ पाया गया और महत्वपूर्ण बिल-बाउचर बाहर बिखरे मिले, जबकि ग्राउंड फ्लोर पर ताला लगा हुआ था। इस घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं कि जब नीचे ताला बंद था तो ऊपर रिकॉर्ड रूम का ताला आखिर कैसे टूटा।
आशा कार्यकर्ताओं ने आशंका जताई है कि कहीं जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा अपनी गर्दन फंसती देख जानबूझकर रिकॉर्ड के साथ छेड़छाड़ तो नहीं की गई। इस घटना के बाद विभागीय अधिकारियों के बीच एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है, जिससे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है।
आशाओं का आरोप है कि उन्हें मिलने वाले अल्प मानदेय में भी मनमानी कटौती की जाती है। कई बार 4 से 5 महीने तक भुगतान नहीं होता और जब भुगतान किया जाता है तो उसमें भी कटौती कर ली जाती है। नाम न छापने की शर्त पर आशा कार्यकर्ताओं ने बताया कि एक ही तरह के कार्य के बावजूद किसी को अधिक और किसी को कम भुगतान किया जाता है।
बताया जा रहा है कि हाल ही में सीडीओ के औचक निरीक्षण में भी सीएचसी बेहजम में कई खामियां सामने आई थीं। यदि आशा भुगतान की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो एक बड़े भ्रष्टाचार का खुलासा हो सकता है, जिसमें सीएचसी अधीक्षक समेत कथित दलालों की भूमिका उजागर होने की आशंका है।
अब निगाहें सीएमओ खीरी डॉ. संतोष गुप्ता पर टिकी हैं कि वे इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हैं या फिर यह कथित खेल यूं ही चलता रहेगा। आशा कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह स्थिति केवल बेहजम सीएचसी तक सीमित नहीं है, बल्कि जनपद की अन्य सीएचसी में भी इसी तरह की अनियमितताएं देखने को मिल रही हैं।