रेलवे-स्टेशनों पर बैटरी कार से लगेज ढुलाई का विरोध तेज, राष्ट्रीय कुली मोर्चा करेगा देशव्यापी आंदोलन

लखनऊ। रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों के सामान ढोने के लिए निर्धारित कुली व्यवस्था को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। राष्ट्रीय कुली मोर्चा ने रेलवे द्वारा बैटरी कारों को लगेज ढुलाई का काम दिए जाने का कड़ा विरोध जताया है। मोर्चा का कहना है कि यह न केवल रेलवे के निर्धारित नियमों और शासनादेशों का उल्लंघन है, बल्कि पूरी प्रक्रिया विधि के भी खिलाफ है। उनका आरोप है कि स्टेशनों पर बैटरी कारों पर लगेज शुल्क 30 रुपये निर्धारित कर देना कुली संवर्ग के अधिकारों का सीधा हनन है, जबकि सामान ढोने का कार्य पारंपरिक रूप से कुलियों के लिए सुरक्षित रखा गया है।

इस मुद्दे को लेकर राष्ट्रीय कुली मोर्चा ने देशव्यापी आंदोलन की घोषणा की है। संगठन ने निर्णय लिया है कि वह प्रधानमंत्री, रेल मंत्री, विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रमुखों और सांसदों को ज्ञापन सौंपकर इस फैसले का विरोध करेगा। इसके तहत 17 अप्रैल से ‘मांग पखवाड़ा’ शुरू किया जाएगा, जो 24 अप्रैल तक चलेगा। इस दौरान कुली अपनी मांगों को लेकर विभिन्न स्तरों पर विरोध दर्ज कराएंगे और 24 अप्रैल को रेल मंत्रालय पहुंचकर औपचारिक रूप से पत्रक सौंपेंगे।

क्या-क्या है मांगे

यह निर्णय मोर्चा की राष्ट्रीय वर्चुअल बैठक में लिया गया, जिसकी अध्यक्षता नेशनल कोऑर्डिनेटर राम सुरेश यादव ने की, जबकि संचालन राहुल कुमार ने किया। बैठक में वक्ताओं ने कहा कि रेलवे मंत्रालय के अधिकारियों ने पूर्व में लिखित रूप से स्पष्ट किया था कि बैटरी कार और कुली एक-दूसरे के पूरक हैं। उनके अनुसार बैटरी कारों का उपयोग बीमार, वृद्ध, विकलांग और असहाय यात्रियों को लाने-ले जाने के लिए किया जाना चाहिए, जबकि यात्रियों के सामान ढोने का कार्य कुलियों के जिम्मे ही रहना चाहिए।

राष्ट्रीय कुली मोर्चा ने दी चेतावनी

इसके विपरीत अब स्टेशनों पर बैटरी कारों को सामान ढुलाई का काम भी दिया जा रहा है, जिसे मोर्चा ने कॉर्पोरेट हितों को बढ़ावा देने वाला कदम बताया है। उनका आरोप है कि सरकार समर्थित ठेकेदारों और बड़े घरानों को लाभ पहुंचाने के लिए कुलियों की आजीविका छीनी जा रही है। मोर्चा ने चेतावनी दी कि यदि सरकार हजारों कुलियों के रोजगार को समाप्त करने पर आमादा है, तो उसे उन्हें रेलवे में समायोजित कर सामाजिक सुरक्षा और स्थायी रोजगार की गारंटी देनी चाहिए।

राष्ट्रीय सम्मेलन में भागीदारी का निर्णय

बैठक में 24 अप्रैल को दिल्ली के राजेंद्र भवन में आयोजित होने वाले राष्ट्रीय सम्मेलन में भागीदारी का भी निर्णय लिया गया। इस सम्मेलन में भारत की विदेश एवं व्यापार नीति, कृषि, रोजगार, ऊर्जा और खाद्यान्न संकट जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होगी। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में देश की अंतरराष्ट्रीय साख कमजोर हुई है और आर्थिक संप्रभुता पर भी खतरा उत्पन्न हुआ है।

उन्होंने कहा कि आम जनता बेरोजगारी, महंगाई और रोजगार के संकट से जूझ रही है, ऐसे में इस सम्मेलन को सफल बनाने के लिए व्यापक भागीदारी जरूरी है। वहीं बैठक में देशभर के कई प्रतिनिधियों ने अपने विचार रखे और आंदोलन को व्यापक समर्थन देने का संकल्प लिया।