
रिपोर्ट – सुनील शर्मा
देवरिया। बेहतर भविष्य की आस लेकर विदेश गया देवरिया का एक मजदूर आज सऊदी अरब की जेल में बंद है। करीब एक वर्ष से कैद इस युवक की रिहाई के लिए उसका परिवार दर-दर की ठोकरें खा रहा है। स्थानीय प्रशासन से लेकर जनप्रतिनिधियों और मुख्यमंत्री तक गुहार लगाई जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस राहत नहीं मिल सकी है।
देवरिया मुख्यालय से लगभग 15 किलोमीटर दूर बरियारपुर थाना क्षेत्र का गांव माधोपुर इस दर्दनाक कहानी का साक्षी है। गांव के एक जर्जर, कच्चे मकान में रहने वाला बैरिस्टर केवट परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने और बच्चों का भविष्य संवारने के लिए विदेश मजदूरी करने गया था। परिजनों के अनुसार, विदेशी कानूनों की जानकारी न होने के कारण वह एक कानूनी मामले में फंस गया और तब से जेल में है।
बताया जा रहा है कि मामले से जुड़े जुर्माने के तौर पर लाखों रुपये की मांग की जा रही है। गरीब परिवार के लिए इतनी बड़ी रकम जुटा पाना नामुमकिन है। घर की महिलाएं दिहाड़ी मजदूरी कर किसी तरह चूल्हा जला रही हैं। दो बेटियां और एक बेटा पिता की राह देख रहे हैं। पढ़ाई प्रभावित हो चुकी है और परिवार आर्थिक संकट से जूझ रहा है।
बूढ़ी मां की आंखों में बेटे की वापसी की आस है, पत्नी की आवाज में बेबसी साफ झलकती है। उनका कहना है, “हम सरकार से हाथ जोड़कर प्रार्थना कर रहे हैं कि हमारे पति को कानूनी मदद दिलाकर वापस लाया जाए। हम इतने सक्षम नहीं कि लाखों रुपये का जुर्माना भर सकें।”
गांव के लोगों का कहना है कि बैरिस्टर मेहनती और जिम्मेदार व्यक्ति था। परिवार की बेहतरी के लिए ही उसने विदेश का रुख किया था। अब ग्रामीण भी प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि भारतीय दूतावास के माध्यम से कानूनी सहायता दिलाई जाए और कूटनीतिक स्तर पर हस्तक्षेप कर उसकी सुरक्षित घर वापसी सुनिश्चित की जाए।
माधोपुर गांव में एक परिवार की उम्मीदें अब शासन-प्रशासन पर टिकी हैं। रोजी-रोटी की तलाश में गया एक मजदूर आज सलाखों के पीछे है और उसके अपने दरवाजे पर टकटकी लगाए बैठे हैं। अब सवाल यही है कि क्या सरकार इस परिवार की पुकार सुनेगी या इंतजार की घड़ी और लंबी होती जाएगी।