
लखनऊ, अप्रैल 2026। डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय के विधि संकाय द्वारा “विकलांगता एवं जेंडर अध्ययन का समेकन: विधिक शिक्षा एवं व्यवहार में दृष्टिकोण और निहितार्थ” विषय पर एक दिवसीय विशेषज्ञ व्याख्यान-सह-कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम ने विधिक शिक्षा के बदलते स्वरूप और समावेशी दृष्टिकोण पर गंभीर एवं सार्थक विमर्श प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम का आयोजन कुलपति प्रो. संजय सिंह के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। वहीं विधि संकाय की डीन प्रो. डॉ. शेफाली यादव का विशेष मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। इस अवसर पर प्रो. वी. के. सिंह भी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में टाटा सामाजिक विज्ञान संस्थान की प्रोफेसर प्रो. निशी मित्रा बोम्बर्ग ने समावेशी विधिक ढांचे और अंतर्संबंधी दृष्टिकोण (इंटरसेक्शनैलिटी) के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि विधिक शिक्षा में जेंडर और विकलांगता अध्ययन का समेकन वर्तमान समय की आवश्यकता है, जिससे न्याय व्यवस्था अधिक संवेदनशील और समावेशी बन सके।
विशेष वक्ता डॉ. आद्या शक्ति राय ने विधिक शिक्षा एवं व्यवहार में विकलांगता और जेंडर दृष्टिकोण के समावेशन से जुड़ी समकालीन चुनौतियों एवं व्यावहारिक पहलुओं पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने छात्रों को इस क्षेत्र में अनुसंधान और व्यवहारिक कार्य की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम का संयोजन डॉ. विजेता दुआ द्वारा किया गया, जिसमें संकाय के अन्य सदस्यों का सक्रिय सहयोग रहा।
इस अवसर पर छात्रों, शोधार्थियों एवं शिक्षकों की उत्साहपूर्ण भागीदारी देखने को मिली, जिससे यह कार्यक्रम अत्यंत ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक साबित हुआ। अंत में धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया।