
बहराइच। हरितालिका तीज के पावन अवसर पर जनपद में आस्था और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला। सुबह से ही मंदिरों में पूजा-अर्चना का दौर शुरू हुआ, जहाँ महिलाओं ने भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना कर निर्जला उपवास रखा और अखंड सुहाग तथा पारिवारिक समृद्धि की मंगलकामनाएँ कीं।
नगर की गलियों और मंदिरों में भक्ति-भाव का माहौल पूरे दिन छाया रहा। भक्तों ने शिवलिंग पर बेलपत्र, पुष्प और गंगाजल अर्पित कर मनोकामनाएँ मांगी। जगह-जगह भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन हुआ, जिससे शहर का वातावरण भक्तिमय बन गया।
पर्व के मुख्य आकर्षण के रूप में नगर में भव्य शोभायात्रा निकाली गई। इसमें सैकड़ों श्रद्धालु शामिल हुए। भगवा और पीले झंडों से सजी गाड़ियाँ, भगवान भोलेनाथ की झांकियाँ और “हर हर महादेव” के जयकारों से गूंजती सड़कों का नजारा मनमोहक रहा। महिलाएँ पारंपरिक परिधान और मेहंदी से सजे हाथों में पूजा की थालियाँ लेकर शोभायात्रा में शामिल हुईं। वहीं, युवा श्रद्धालु भक्ति गीतों और “बम-बम भोले” के नारों के साथ माहौल को और भी ऊर्जावान बनाते दिखे।
सड़कें श्रद्धालुओं से सराबोर थीं। झांकियों और डीजे पर बजते भजनों पर भक्त नाचते-गाते आगे बढ़ते रहे। ट्रैक्टर-ट्रॉली और अन्य वाहनों पर सजी भगवान शिव की झांकियाँ आकर्षण का केंद्र बनीं। बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक सभी ने इस धार्मिक उत्सव में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हरितालिका तीज के दिन माता पार्वती ने कठोर तप कर भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त किया था। तभी से यह व्रत विवाहित और अविवाहित दोनों ही महिलाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। विवाहित महिलाएँ पति की दीर्घायु के लिए और अविवाहित कन्याएँ योग्य वर की प्राप्ति हेतु इस व्रत का पालन करती हैं।
आस्था और परंपरा से ओत-प्रोत हरितालिका तीज ने मंगलवार को बहराइच को पूरी तरह भक्ति के रंग में रंग दिया।