जल संवाद की मिसाल बनी जल सहेलियों की पदयात्रा, फतेहाबाद में हुआ ऐतिहासिक स्वागत

फतेहाबाद। यमुना नदी को अविरल और निर्मल बनाने के संकल्प के साथ निकली जल सहेलियों की पदयात्रा का ग्यारहवें दिन फतेहाबाद में भव्य और ऐतिहासिक स्वागत किया गया। जल संरक्षण को जनआंदोलन का रूप देने की दिशा में यह पदयात्रा अब जल संवाद और जनजागरण का सशक्त माध्यम बन चुकी है। मुख्य बाजार में व्यापारियों, दुकानदारों और नागरिकों ने फूलों की वर्षा कर जल सहेलियों का उत्साहवर्धन किया और अभियान के प्रति अपना समर्थन जताया।
पदयात्रा की शुरुआत बाबा की तिवारिया स्थित स्वामी चिन्मयानंद जी महाराज के आश्रम से यमुना मैया के कलश पूजन के साथ हुई। इसके बाद जल सहेलियां मुख्य बाजार पहुंचीं, जहां विभिन्न व्यापारी संगठनों द्वारा स्वागत द्वार बनाकर यात्रा का अभिनंदन किया गया। अशोक पासवाल के नेतृत्व में व्यापारियों ने फूल-मालाएं पहनाकर जल सहेलियों का सम्मान किया। इस अवसर पर दीपक गुप्ता, गजेंद्र, विष्णु गुप्ता, अशोक कुमार, योगेश कुमार, राजकुमार, संदीप सिंह, संतोष सिंह गहलोत, सुशील शर्मा और संजीव शर्मा सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
पूरे बाजार में जल संरक्षण से जुड़े नारों और संदेशों से वातावरण जागरूकता से भर गया। व्यापारियों ने कहा कि जल संरक्षण आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है और समाज के प्रत्येक व्यक्ति को इसमें अपनी भूमिका निभानी चाहिए। पक्षी वैज्ञानिक डॉ. के.पी. सिंह ने बताया कि क्षेत्र के 15 में से 12 ब्लॉक जल संकट से प्रभावित हैं, जो गंभीर चिंता का विषय है। तेजेंद्र सिंह गुर्जर ने जल संरक्षण को समाज की सामूहिक जिम्मेदारी बताया, जबकि स्वामी महेशा नन्द जी ने इस पदयात्रा को प्रेरणादायक जनजागरण अभियान बताया।
जल सहेली समिति की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रेखा ने कहा कि यह यात्रा समाज में जल के प्रति जिम्मेदारी का भाव विकसित करने का प्रयास है। जल सहेलियों उषा देवी और मीरा ने कहा कि जनसहयोग से इस अभियान को नई ऊर्जा मिल रही है और सामूहिक प्रयास से ही जल संरक्षण संभव है।
रविवार दोपहर पदयात्रा बाजिदपुर स्थित ए.के. गार्डन पहुंची, जहां श्री अन्नपूर्णेश्वरी गौशाला एवं वृद्धाश्रम हरीपुरा के पदाधिकारियों ने जल सहेलियों को पट्टिका पहनाकर सम्मानित किया और जलपान कराया। इसके बाद बरीपुरा स्थित अन्नपूर्णेश्वरी गौशाला एवं वृद्धाश्रम में विधिवत यमुना आरती कर यमुना को स्वच्छ और अविरल बनाए रखने का संकल्प लिया गया। संतों, समिति पदाधिकारियों और स्थानीय नागरिकों ने जल संरक्षण को जन-जन तक पहुंचाने की प्रतिबद्धता दोहराई।