सत्ता के दबाव में पट्टा लूट का आरोप, कप्तानगंज तहसीलदार के खिलाफ डीएम कार्यालय पर फूटा मछुआरों का गुस्सा

कुशीनगर। जनपद की कप्तानगंज तहसील इन दिनों तालाब-पोखरों के पट्टा आवंटन को लेकर गंभीर विवाद का केंद्र बनी हुई है। मत्स्यजीवी सहकारी समिति गंभीरपुर के दर्जनों सदस्यों ने जिलाधिकारी कार्यालय पर धरना-प्रदर्शन कर कप्तानगंज तहसीलदार पर सत्ता के दबाव में नियमों की अनदेखी करने और पट्टा गलत तरीके से आवंटित करने का गंभीर आरोप लगाया।
प्रदर्शन कर रहे मछुआरों का कहना है कि शासन के स्पष्ट नियमों के अनुसार समिति क्षेत्र में आने वाले तालाब, पोखर और ताल का पट्टा स्थानीय मत्स्यजीवी सहकारी समिति को ही दिया जाना चाहिए था, लेकिन नियमों को दरकिनार कर पट्टा दूसरी समिति के नाम कर दिया गया। मछुआरों ने आरोप लगाया कि इस पूरे प्रकरण के पीछे प्रदेश के मत्स्य मंत्री डॉ. संजय निषाद के रिश्तेदारों को लाभ पहुंचाने का प्रयास किया गया है। उनका कहना है कि यह केवल प्रशासनिक चूक नहीं बल्कि सत्ता के संरक्षण में किया गया सुनियोजित “पट्टा लूट कांड” है।
धरना दे रहे मछुआरों ने कहा कि वर्षों से जिन जलस्रोतों पर उनकी आजीविका निर्भर रही है, उन्हें उनसे छीना जा रहा है। गरीब और मेहनतकश मछुआरे रोजी-रोटी के संकट से जूझ रहे हैं, जबकि प्रभावशाली लोग राजनीतिक पहुंच का इस्तेमाल कर सरकारी संपत्तियों पर कब्जा जमा रहे हैं। उन्होंने इसे मत्स्य पालन नियमावली के साथ-साथ सामाजिक न्याय की भावना के भी खिलाफ बताया।
प्रदर्शनकारियों का यह भी आरोप है कि यदि पट्टा प्रक्रिया पारदर्शी होती तो उन्हें जिलाधिकारी कार्यालय पर धरना देने की आवश्यकता नहीं पड़ती। उन्होंने कहा कि कप्तानगंज तहसील में पट्टा आवंटन नियमों से नहीं बल्कि राजनीतिक सिफारिशों के आधार पर किया जा रहा है, जिससे सरकार और प्रशासन की छवि धूमिल हो रही है।
धरने का नेतृत्व कर रहे मोनू निषाद ने जिलाधिकारी से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, अवैध रूप से किए गए पट्टा आवंटन को तत्काल निरस्त करने, दोषी तहसीलदार के खिलाफ कार्रवाई करने और नियमों के अनुसार गंभीरपुर मत्स्यजीवी सहकारी समिति को पट्टा देने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को सड़क से सदन तक ले जाया जाएगा।