भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा सरयू नहान घाट का आंगनबाड़ी केंद्र, बच्चों के भविष्य पर सवाल

रिपोर्टर – रोहित जायसवाल

कर्नलगंज, गोंडा। कर्नलगंज नगर क्षेत्र के वार्ड संख्या 17 और 05 के बीच सरयू नहान घाट पर स्थित आंगनबाड़ी केंद्र अपने अस्तित्व पर ही सवाल खड़ा कर रहा है। महीनों से लापरवाही और भ्रष्टाचार के चलते केंद्र पूरी तरह बदहाल है। महीने में कुछ ही दिन खुलने वाला यह केंद्र बच्चों के पोषण और शिक्षा की मूलभूत जरूरतों को पूरा करने में असफल साबित हो रहा है। केंद्र परिसर में फैली जंगली झाड़ियां, बड़ी घास और गंदगी स्पष्ट रूप से दिखाती हैं कि इसकी देखभाल करने वाला कोई नहीं है।

स्थानीय लोगों के अनुसार केंद्र में कार्यकत्री और सहायिका कभी-कभार आती हैं, लेकिन थोड़ी देर बाद ताला लगाकर चली जाती हैं। बच्चों के लिए नियमित पोषण आहार उपलब्ध नहीं कराया जाता और न ही कोई शैक्षणिक गतिविधि संचालित होती है। इस कारण बच्चों के स्वास्थ्य और शिक्षा दोनों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। छोटे बच्चों को पढ़ाई के लिए केंद्र से लगभग एक किलोमीटर दूर अन्य स्कूलों में भेजना पड़ता है, जिससे अभिभावकों को चिंता रहती है।

पराना कश्यप

वार्ड निवासी बुधराम कश्यप ने बताया कि सरकारी पैसा खर्च हो रहा है लेकिन यहां न बच्चों को खाना मिलता है, न पढ़ाई की कोई व्यवस्था है। पराना कश्यप ने कहा कि अधिकारी कभी भी केंद्र का निरीक्षण नहीं करते। पिंकी नामक स्थानीय महिला ने बताया कि आंगनबाड़ी केंद्र में न सेविकाओं की उपस्थिति सुनिश्चित है और न ही बच्चों की सुरक्षा की कोई व्यवस्था।

बुधाई कश्यप

वहीं जनक दुलारी ने कहा कि गंदगी और झाड़ियों के बीच खेलने को मजबूर बच्चों पर हर वक्त बीमारियों का खतरा बना रहता है और पोषण आहार भी समय पर नहीं मिलता।

पिंकी

स्थानीय सभासद लक्ष्मी कश्यप ने कहा कि यह भवन केवल चुनाव के समय बूथ सेंटर के रूप में काम आता है और शिकायतों के बावजूद कोई सुनवाई नहीं होती। उन्होंने प्रशासन से केंद्र की जांच कराकर सेविकाओं की उपस्थिति सुनिश्चित करने और वार्ड में प्राथमिक विद्यालय खोलने की मांग की।

जनक दुलारी

इस मामले में सीडीपीओ महेंद्र वर्मा ने कहा कि कर्नलगंज में आंगनबाड़ी केंद्र बंद रहने की शिकायत गंभीर है। इसकी जांच कराकर उचित कार्रवाई की जाएगी।

वार्डवासियों का कहना है कि अगर हालात नहीं सुधरे तो वे आंदोलन करने को बाध्य होंगे। सरयू नहान घाट का यह आंगनबाड़ी केंद्र बच्चों के अधिकारों से खिलवाड़ और सरकारी तंत्र की उदासीनता का जीवंत उदाहरण बन गया है।