
लखनऊ, राष्ट्रीय युवा दिवस की सुबह लखनऊ की सड़कों पर कुछ अलग ही नज़ारा था। ठंडी हवा के बीच तेज़ कदमों की आवाज़, दौड़ती सांसें और चेहरों पर आत्मविश्वास—यह दृश्य था अभ्युदय यूथ क्लब द्वारा आयोजित समरस मैराथन का, जिसने फिटनेस को उत्सव और अनुशासन को प्रेरणा में बदल दिया। “खेलेगा भारत, खिलेगा भारत” के संकल्प के साथ यह आयोजन युवाओं में सामाजिक समरसता और स्वस्थ जीवनशैली का संदेश लेकर सामने आया।

उत्तर प्रदेश सरकार के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कुड़ियाघाट ग्रीन कॉरिडोर रोड से 5 किलोमीटर की मैराथन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। उन्होंने कहा कि खेल केवल प्रतिस्पर्धा नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने का माध्यम हैं। ऐसे आयोजनों से युवा शारीरिक और मानसिक रूप से सशक्त होते हैं और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ते हैं।
इस अवसर पर स्नातक क्षेत्र से एमएलसी अवनीश सिंह विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे। वहीं आईटीबीपी के जवानों की सहभागिता ने आयोजन में अनुशासन और राष्ट्रभाव का रंग भर दिया। स्वामी विवेकानंद के विचारों से प्रेरित यह दौड़ घंटाघर और लखनऊ के ऐतिहासिक मार्गों से होकर गुजरी, जहां देश के विभिन्न राज्यों से आए पुरुष और महिला धावकों ने पूरे जोश के साथ भाग लिया।
प्रतियोगिता में बालक वर्ग में रवि कुमार पाल ने 15 मिनट 32 सेकंड में दूरी तय कर प्रथम स्थान प्राप्त किया। इस्लाम अली 16 मिनट 02 सेकंड के साथ दूसरे और राजेश सिंह 16 मिनट 09 सेकंड में तीसरे स्थान पर रहे। बालिका वर्ग में शशिलता ने 18 मिनट 40 सेकंड में प्रथम स्थान हासिल किया, जबकि वर्षा सिंह और सृष्टि सिंह क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर रहीं।
पुरस्कार वितरण समारोह में पुरुष वर्ग के विजेताओं को क्रमशः 10,000, 5,000 और 3,000 रुपये की नकद राशि प्रदान की गई। इसके अतिरिक्त सात धावकों को 500-500 रुपये के सांत्वना पुरस्कार दिए गए। महिला वर्ग में भी इसी तर्ज पर कुल दस पुरस्कार प्रदान किए गए।
अपने संबोधन में मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि खेल युवाओं को अनुशासन, धैर्य और आत्मविश्वास सिखाते हैं। समरस मैराथन जैसे आयोजन समाज में भाईचारे और एकता की भावना को मजबूत करते हैं।
आयोजन की सफलता में माधवेन्द्र सिंह, मनोज सिंह, अनिल वर्मा, डॉ. वीरेन्द्र कुमार और दिनेश सिंह राणा सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों का योगदान रहा। साथ ही ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय की 20 यूपी एनसीसी गर्ल्स बटालियन की 50 कैडेट्स ने स्वयंसेवक के रूप में अनुकरणीय भूमिका निभाई। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अजय तनेजा के सहयोग से आईं एनसीसी कैडेट्स, डॉ. मुकेश कुमार के निर्देशन में सुबह से ही आयोजन स्थल पर तैनात रहीं, जिनमें डॉ. बुशरा अलवेरा का भी विशेष सहयोग रहा।
कुल मिलाकर, समरस मैराथन केवल एक खेल आयोजन नहीं रहा, बल्कि यह युवाओं में ऊर्जा, एकता और सामाजिक समरसता का संदेश देने वाला प्रेरणादायी प्रयास साबित हुआ—एक ऐसा प्रयास, जिसने लखनऊ की सड़कों पर सशक्त और स्वस्थ भारत का सपना साकार कर दिखाया।