ब्रज भाषा में नहीं सुनाई देगी किसान वाणी

मथुरा। ब्रज क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम ‘किसान वाणी’ अब ब्रज भाषा में सुनाई नहीं देगा। प्रसार भारती के नए सर्कुलर के तहत 1 अप्रैल से यह व्यवस्था लागू हो जाएगी, जिससे आकाशवाणी मथुरा-वृंदावन केंद्र पर स्थानीय भाषा में तैयार होने वाले कार्यक्रम बंद हो जाएंगे।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, 17 मार्च को प्रसार भारती के डीजी कार्यालय से सहायक निदेशक (प्रोग्राम) सुधीर राजोरिया द्वारा जारी आदेश में नई प्रसारण व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके तहत अब उत्तर प्रदेश के केवल चार केंद्र—ओबरा, झांसी, बरेली और लखनऊ—पर तैयार कार्यक्रम ही पूरे प्रदेश के आकाशवाणी स्टेशनों से रिले किए जाएंगे।
अब तक ‘किसान वाणी’ कार्यक्रम विभिन्न क्षेत्रीय भाषाओं में प्रसारित होता था, जिसमें ब्रज भाषा, अवधी और बुंदेली जैसी लोकभाषाएं शामिल थीं। सप्ताह में तीन दिन प्रसारित होने वाले इस कार्यक्रम में किसानों और कृषि विशेषज्ञों के बीच सीधा संवाद भी होता था, जिससे किसानों की समस्याओं का समाधान होता था।
नई व्यवस्था के तहत अब यह कार्यक्रम खड़ी बोली में तैयार होकर पूरे प्रदेश में प्रसारित किया जाएगा। इससे स्थानीय भाषाओं और बोलियों में संवाद की परंपरा पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
इस फैसले के विरोध में आवाजें उठने लगी हैं। कैजुअल कंपेयर-एनाउंस एसोसिएशन के सचिव दिलीप कुमार यादव ने इसे ब्रज भाषा और संस्कृति की उपेक्षा बताया है। उनका कहना है कि आकाशवाणी मथुरा-वृंदावन केंद्र की स्थापना ही ब्रज भाषा के संरक्षण के उद्देश्य से की गई थी, ऐसे में स्थानीय भाषा के कार्यक्रम बंद करना उचित नहीं है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बदलाव से किसानों तक स्थानीय भाषा में जानकारी पहुंचाने की प्रभावशीलता प्रभावित हो सकती है, जिससे ग्रामीण संचार व्यवस्था पर भी असर पड़ सकता है।