भगवान राम ने मनुष्य को मर्यादाओं के साथ जीना सिखाया

कोसीकलां। ब्रज चौरासी कोस यात्रा क्षेत्र के गांव कोटवन स्थित ठाकुर श्री बृजभूषण मंदिर में आयोजित श्रीरामकथा एवं श्रीराम महायज्ञ के दूसरे दिन प्रातः 10 बजे से पावन रामकथा का भव्य शुभारंभ हुआ। श्रद्धा और भक्ति से ओतप्रोत वातावरण में कथा का शुभारंभ पीपाद्वाराचार्य श्री बलराम दास महाराज, श्रीरामकथा वक्ता पूज्य चिन्मयानंद बापु, महंत नरहरि दास, देवकीनंदन महाराज द्वारा व्यास पीठ के पूजन एवं आरती के साथ किया गया।
कथा के शुभारंभ अवसर पर मुख्य अतिथि संतों ने व्यास पीठ का पूजन कर मलूक पीठाधीश्वर श्री राजेन्द्र दास महाराज का माला, दुपट्टा एवं चंदन लगाकर सम्मानपूर्वक स्वागत किया। रामकथा के श्रवण हेतु विशाल पंडाल में हजारों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे, जिन्होंने भक्तिभाव के साथ दूसरे दिन की कथा का रसपान किया।
दूसरे दिन की कथा में भगवान श्रीराम के जन्म, कैकेयी को प्राप्त वरदान, राम-सीता-लक्ष्मण के वनवास तथा राजा दशरथ के विलाप जैसे करुण एवं प्रेरक प्रसंगों का विस्तार से वर्णन किया गया। व्यास पीठ से प्रवचन करते हुए मलूक पीठाधीश्वर पूज्य श्री राजेन्द्र दास महाराज ने कहा कि भगवान राम ने मानव जीवन को मर्यादाओं, कर्तव्य और आदर्शों के साथ जीने की शिक्षा दी। उन्होंने रामकथा को कलियुग के पापों का नाश करने वाली बताते हुए निषादराज के बालकों को भगवान राम द्वारा गोद में बिठाकर स्नेह प्रदान करने के प्रसंग के माध्यम से समता, प्रेम और करुणा का संदेश दिया।
उन्होंने रामचरितमानस को “सत्यम्, शिवम्, सुंदरम्” स्वरूप बताते हुए कहा कि यह शिव के हस्ताक्षर से युक्त परम पवित्र ग्रंथ है, जिसे स्वस्थ चित्त होकर सुनने मात्र से मानव का कल्याण होता है। कथा के दौरान नाम संकीर्तन पर विशेष बल दिया गया और “राजा राम, राजा राम” के सामूहिक कीर्तन से संपूर्ण पंडाल भक्तिरस में डूब गया।
इस अवसर पर मथुरा से तीन बार के पूर्व सांसद कुंवर मानवेन्द्र सिंह, महंत श्री शिवदास जी महाराज (मुंबई), महंत श्री रामलखन दास जी (दिगम्बर अखाड़ा, अयोध्या), महंत श्री रामरतन दास, महंत श्री भारतदास सहित अनेक संत-महात्मा, धर्माचार्य एवं क्षेत्र के गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।