महिला सम्मान के दावों पर सवाल, चार दिन से भूखी अनशन पर बैठी दिव्यांग अल्पना तिवारी, प्रशासन बेखबर

कुशीनगर। महिला सम्मान, सुरक्षा और संवेदनशील शासन के बड़े-बड़े दावों की जमीनी हकीकत कुशीनगर जनपद के रामकोला थाना क्षेत्र अंतर्गत सिंगहा गांव की दिव्यांग महिला अल्पना तिवारी के मामले में सवालों के घेरे में आ गई है। चलने-फिरने में असमर्थ दिव्यांग अल्पना तिवारी पिछले चार दिनों से खुले आसमान के नीचे भूखी-प्यासी अनशन पर बैठी है, लेकिन अब तक न तो प्रशासन की संवेदना जागी और न ही कोई जिम्मेदार अधिकारी उसकी सुध लेने पहुंचा।
बताया जाता है कि दबंगों की कथित प्रताड़ना से पीड़ित अल्पना तिवारी ने न्याय की आस में थाने से लेकर कलेक्ट्रेट तक, अधिकारियों से लेकर जनप्रतिनिधियों तक और मुख्यमंत्री से राष्ट्रपति तक अपनी फरियाद पहुंचाई, लेकिन हर जगह उसे सिर्फ आश्वासन, खामोशी और टालमटोल ही मिली। जब न्याय की उम्मीदें टूटने लगीं तो उसने राष्ट्रपति को इच्छामृत्यु की गुहार तक लगा दी, जो सिस्टम की संवेदनहीनता के आगे बेअसर साबित हुई।
चार दिनों से अनशन पर बैठी अल्पना का कहना है कि वह अब इस व्यवस्था से थक चुकी है, जहां एक दिव्यांग महिला की पीड़ा सुनने वाला कोई नहीं है। भूख और कमजोरी से उसका शरीर जवाब देने लगा है, लेकिन प्रशासनिक अमला अब तक मौन साधे हुए है। यह स्थिति न सिर्फ महिला सम्मान और दिव्यांग अधिकारों पर सवाल खड़े करती है, बल्कि शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली को भी कटघरे में खड़ा करती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते अल्पना तिवारी की शिकायतों की निष्पक्ष जांच कर उसे न्याय नहीं दिलाया गया और अनशन के दौरान उसके साथ कोई अनहोनी होती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। एक दिव्यांग महिला का इस तरह जीवन को दांव पर लगाकर न्याय मांगना सिस्टम की विफलता का सबसे कड़वा सच उजागर करता है।