दबंगों की दबंगई में टूटा छत का सपना, दिव्यांग महिला अनशन पर बैठी

कुशीनगर। जनपद के रामकोला थाना क्षेत्र के सिंगहा गांव की दिव्यांग महिला अल्पना तिवारी सोमवार को अपने ही घर के सामने अनशन पर बैठ गई हैं। खुले आसमान के नीचे बैठी अल्पना की खामोशी शासन-प्रशासन की कार्यशैली और संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
अल्पना दिव्यांग जरूर हैं, लेकिन उनकी उम्मीद कभी कमजोर नहीं रही। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत जब उनके नाम मकान स्वीकृत हुआ, तो उन्हें लगा कि अब जीवन की कठिनाइयां कुछ कम होंगी और सिर पर पक्की छत नसीब होगी। मगर यह सपना ज्यादा दिन टिक नहीं सका। आरोप है कि दबंग विपक्षियों और पुलिस दबाव की मिलीभगत से उनका निर्माण कार्य जबरन रुकवा दिया गया, जिससे एक बार फिर उनका घर का सपना टूट गया।
महीनों से अल्पना खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। ठंड, भूख और असुरक्षा की रातें उनके लिए किसी सज़ा से कम नहीं हैं। न्याय की आस में उन्होंने जिलाधिकारी से लेकर उच्च अधिकारियों और मुख्यमंत्री तक गुहार लगाई, लेकिन कहीं से कोई सुनवाई नहीं हुई। हताश होकर उन्होंने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर इच्छामृत्यु तक की मांग कर डाली, जो किसी सनक का नहीं बल्कि टूट चुकी उम्मीदों का परिणाम बताया जा रहा है।
अनशन पर बैठी अल्पना किसी से लड़ाई नहीं चाहतीं, वह सिर्फ इतना चाहती हैं कि जो अधिकार उन्हें मिला है, उसे जीने दिया जाए। उनका कहना है कि वे सरकार से कुछ अतिरिक्त नहीं मांग रहीं, बस अपने स्वीकृत आवास का निर्माण पूरा कराना चाहती हैं।
यह मामला केवल प्रशासनिक लापरवाही का नहीं, बल्कि मानवीय संवेदना की विफलता का प्रतीक बनता जा रहा है। सवाल उठता है कि क्या सरकारी योजनाएं सिर्फ कागजों तक सीमित हैं और गरीब-दिव्यांगों का जीवन केवल आंकड़ों में सिमट कर रह गया है। खुले आसमान के नीचे अनशन पर बैठी एक दिव्यांग महिला ने पूरे सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर दिया है। अब देखना यह है कि सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ की सरकारी मशीनरी इस पीड़ा पर कब और कैसे संज्ञान लेती है।