तीन चिकित्सकों का पैनल भी नहीं सुलझा सका दलित नाबालिग प्रीती की मौत का रहस्य, पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल

लखीमपुर खीरी। जनपद में 16 वर्षीय दलित नाबालिग प्रीती की संदिग्ध मौत की गुत्थी तीन चिकित्सकों का पैनल भी नहीं सुलझा सका है। पोस्टमार्टम के बाद भी मौत का स्पष्ट कारण सामने नहीं आया। क्षेत्राधिकारी सदर विवेक तिवारी के अनुसार प्रीती के शरीर पर किसी प्रकार की बाहरी चोट के निशान नहीं पाए गए हैं। मौत के कारणों की जांच के लिए पेट में मौजूद विसरा सुरक्षित कर परीक्षण के लिए भेजा गया है।
मृतका के चचेरे भाई कालीचरन निवासी ग्राम बिडहनापुर, पुलिस चौकी महेवागंज (कोतवाली सदर क्षेत्र) ने बताया कि 7 दिसंबर की रात करीब 11 बजे प्रीती अचानक घर से गायब हो गई थी। रात लगभग तीन बजे प्रीती का फोन उसके पिता रामकुमार के मोबाइल पर आया, जिसमें उसने कहा कि “हमें यहां से उठा ले चलो, ये लोग हमें मार डालेंगे।” परिजन किसी तरह उसे घर लाए, जहां प्रीती ने अपने साथ हुई घटना की आपबीती बताई। परिजन दवा लेकर आए, लेकिन अगले ही दिन प्रीती की मौत हो गई।
आरोप है कि इसके बाद एक एसएसबी जवान सक्रिय हुआ और परिजनों को धमकाकर शव को जल्दबाजी में दफन करा दिया गया। इस बीच मामले को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं फैलने लगीं। करीब बीस दिन बाद परिजनों ने हिम्मत जुटाकर जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक से शिकायत की। इसके बाद पुलिस ने कथित दुष्कर्म के आरोप में रंजीत और सोनू को गिरफ्तार किया, जबकि बताया जा रहा है कि प्रीती का प्रेमी करन फरार है।
मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि एसएसबी का जवान मृतका के परिजनों को धमकाने की स्थिति में कैसे आया और पुलिस ने उस समय क्या भूमिका निभाई। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कोतवाली सदर पुलिस पूरे प्रकरण को दबाने का प्रयास करती दिखाई दी, जिससे जनमानस में पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। अब सबकी निगाहें विसरा जांच रिपोर्ट और आगे की जांच पर टिकी हैं।