
लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (KGMU) ने हालिया घटनाक्रम से जुड़े सभी तथ्य सार्वजनिक करते हुए स्पष्ट किया कि कथित यौन उत्पीड़न मामले में विशाखा समिति ने 15 दिनों के भीतर निष्पक्ष जांच पूरी कर ली है। जांच में डॉक्टर रमीज़ दोषी पाए गए हैं और उनके दाखिले को रद्द करने की सिफारिश की गई है।
भ्रामक सूचनाओं से बचाव और स्थिति स्पष्ट करने के उद्देश्य से कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद की अध्यक्षता में एक प्रेस वार्ता आयोजित की गई, जिसमें विश्वविद्यालय प्रशासन, शिक्षक, कर्मचारी, नर्सिंग व छात्र संघ के प्रतिनिधि शामिल रहे। यह प्रेस वार्ता शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हुई।
KGMU के अनुसार, प्रेस वार्ता के बाद बिना पूर्व सूचना राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव लोगों की भीड़ के साथ विश्वविद्यालय परिसर पहुंचीं। भीड़ के अचानक पहुंचने से स्थिति तनावपूर्ण हो गई और आरोप है कि भीड़ ने कुलपति कार्यालय में जबरन प्रवेश कर तोड़फोड़ और नारेबाजी की। सुरक्षा की दृष्टि से कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद को सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया। घटना की सूचना राज्यपाल, मुख्यमंत्री और संबंधित मंत्रियों को दी गई। पुलिस ने करीब एक घंटे में हालात पर काबू पाया, लेकिन इस अराजकता के कारण परीक्षाएं और प्रोमोशन से जुड़े साक्षात्कार बाधित हुए। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसे शैक्षणिक और प्रशासनिक व्यवस्था पर सीधा हमला बताते हुए दोषियों पर सख्त कार्रवाई और शांति बनाए रखने की अपील की है।
इसी बीच, KGMU के धर्मांतरण मामले में आरोपी डॉक्टर रमीज़ मलिक को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। लखनऊ से हुई इस गिरफ्तारी के समय रमीज़ मलिक एक फ्लैट से सामान निकालने पहुंचा था। पुलिस के अनुसार, उस पर 50 हजार रुपये का इनाम घोषित था। सर्विलांस और मुखबिर की सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने उसे दबोच लिया। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी