लखनऊ में बौद्ध भिक्षुओं का भव्य शांति मार्च: विश्व शांति का दिया संदेश

लखनऊ। राजधानी लखनऊ में बौद्ध भिक्षुओं एवं पूज्य भन्तेगणों द्वारा विश्व शांति के पावन संदेश के साथ एक भव्य शांति मार्च का आयोजन किया गया। यह मार्च डॉ. अम्बेडकर महासभा कार्यालय, विधानसभा मार्ग से प्रारंभ होकर हजरतगंज चौराहा होते हुए उप मुख्यमंत्री के कैंप कार्यालय तक निकाला गया। इस दौरान बड़ी संख्या में भिक्षु, श्रद्धालु और आमजन शामिल हुए।

वहीं इस दौरान उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने अपने कैम्प कार्यालय पर पहुंचे भन्तेगणों का आत्मीय स्वागत और अभिनंदन किया। उन्होंने सभी भिक्षुओं को अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया और विश्व शांति के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के इस प्रयास की सराहना की।

“बुद्धम् शरणम् गच्छामि ही शांति का मार्ग”

डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि शांति का एकमात्र मार्ग “बुद्धम् शरणम् गच्छामि” है। उन्होंने भारत की परंपरा को शांति, समता और मानवता पर आधारित बताते हुए कहा कि आज के वैश्विक परिदृश्य में यह और अधिक प्रासंगिक हो गया है कि “भारत ने दुनिया को बुद्ध दिया है, युद्ध नहीं”। उन्होंने वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि जब कई देश युद्ध और अस्थिरता से जूझ रहे हैं, तब भगवान बुद्ध की शिक्षाएं मानवता के लिए आशा और मार्गदर्शन का आधार बन रही हैं।

सम्राट अशोक और बुद्ध विचारधारा का वैश्विक प्रसार

उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने सम्राट अशोक के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने बुद्ध के उपदेशों को विश्वभर में फैलाने का ऐतिहासिक कार्य किया। साथ ही उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री के निर्देश पर उन्हें प्रतिनिधिमंडल के साथ भगवान बुद्ध के पवित्र पिपरहवा अवशेषों को रूस के काल्मिकिया ले जाने का अवसर मिला, जहां लाखों श्रद्धालुओं ने दर्शन किए।

“विरासत और विकास” के साथ आगे बढ़ रही सरकार

केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि राज्य में “विरासत और विकास” को साथ लेकर कार्य किया जा रहा है। काशी, मथुरा और अयोध्या जैसे धार्मिक स्थलों के साथ-साथ सारनाथ, संकिसा और कुशीनगर जैसे बौद्ध स्थलों के विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

वक्ताओं ने शांति और करुणा का दिया संदेश

कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश अम्बेडकर महासभा के अध्यक्ष एवं विधान परिषद सदस्य डॉ. लालजी प्रसाद निर्मल ने कहा कि प्रदेश सरकार बुद्ध विहारों के विकास के लिए लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि शांति, प्रगति और उन्नति का मार्ग भगवान बुद्ध की शरण में ही निहित है।

अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध संस्थान के सदस्य भन्ते शीलरतन ने भी अपने संबोधन में विश्व शांति और करुणा के संदेश को अपनाने का आह्वान किया।