
रामनगर (बाराबंकी)। लोधेश्वर महादेवा में कॉरिडोर निर्माण के लिए चल रहे ध्वस्तीकरण कार्य के दौरान गुरुवार को उस समय सनसनी फैल गई जब मलबा भरते समय मजदूरों को चांदी के सिक्के मिल गए। घटना की जानकारी फैलते ही क्षेत्र में हलचल मच गई और देखते ही देखते बड़ी संख्या में लोग मौके पर पहुंच गए।
स्थानीय लोगों के अनुसार, महादेवा के प्रसिद्ध व्यापारी सेठ जय नारायण गुप्ता, हरी नारायण गुप्ता और काशी नारायण गुप्ता के पुराने मकान को ध्वस्त कर उसके मलबे को कॉरिडोर निर्माण स्थल पर भरा जा रहा था। इस दौरान मजदूरों को चांदी के सिक्के मिले। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि मजदूर सिक्कों को अपनी जेब में भरने लगे और आपस में बांटने को लेकर उनमें विवाद भी हो गया। मामला बढ़ने पर जानकारी पुलिस तक पहुंची।
पुलिस मौके पर पहुंची और मलबा भर रहे मजदूरों की तलाशी ली, जिसमें उनकी जेब से करीब 75 चांदी के सिक्के बरामद हुए। ये सिक्के महारानी विक्टोरिया और जॉर्ज पंचम के शासनकाल के बताए जा रहे हैं।
भू-स्वामी हरी नारायण गुप्ता ने बताया कि मजदूरों से 75 सिक्के तो बरामद हुए हैं, लेकिन सिक्कों को रखने वाला मटका अभी तक नहीं मिला है। उन्होंने मांग की कि वह मटका भी खोजा जाना चाहिए, जिसमें और सिक्के रखे गए थे। सिक्कों के मटके के न मिलने से क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
घटना की जानकारी मिलने पर प्रशासनिक और राजस्व अधिकारी भी मौके पर पहुंचे। ज्वाइंट मजिस्ट्रेट गुंजिता अग्रवाल, नायब तहसीलदार विजय प्रकाश तिवारी, प्रभारी निरीक्षक अनिल कुमार पांडेय, चौकी प्रभारी अभिनंदन पांडे और राजस्वकर्मी मौजूद रहे। अधिकारियों ने बरामद सिक्कों को कब्जे में लेकर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।
महादेवा कॉरिडोर क्षेत्र में अचानक मिले इन चांदी के सिक्कों ने जहां मजदूरों के बीच अफरा-तफरी मचा दी, वहीं स्थानीय लोगों के बीच यह चर्चा का विषय बन गया है कि कहीं मलबे में और भी कीमती धरोहर तो छिपी नहीं है। प्रशासन अब पूरे प्रकरण की जांच कर रहा है।