महायुद्ध की आग पहुंची रसोई तक: 26 साल में ₹196 से ₹913 तक पहुंचा एलपीजी सिलेंडर

लखनऊ | दुनिया में बढ़ते युद्ध, वैश्विक तनाव और कच्चे तेल के बाजार में उतार-चढ़ाव का असर अब आम आदमी की रसोई तक साफ दिखाई दे रहा है। घरेलू रसोई गैस (नॉन-सब्सिडाइज्ड एलपीजी) सिलेंडर की कीमतों का पिछले 26 वर्षों का आंकड़ा बताता है कि वर्ष 2000 में करीब ₹196.55 का मिलने वाला सिलेंडर अब 2026 में लगभग ₹913 तक पहुंच गया है।
आंकड़ों के अनुसार 2000 से 2004 के बीच एलपीजी की कीमतों में धीरे-धीरे बढ़ोतरी हुई। 2001 में कीमत ₹221.05, 2002 में ₹265.45 और 2003 में ₹281.60 तक पहुंच गई। 2004 में कीमत स्थिर रही और इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ।


इसके बाद 2005 से 2007 तक सिलेंडर की कीमत लगभग ₹294.75 के आसपास बनी रही। लेकिन 2008 में कीमत बढ़कर ₹346.30 हो गई। इसके अगले वर्ष 2009 में कीमत घटकर ₹281.20 हो गई, जो उस समय एक बड़ी गिरावट मानी गई।
2010 के बाद एलपीजी कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी देखने को मिली। 2010 में कीमत ₹345.35 थी, लेकिन 2011 में यह बढ़कर ₹710 तक पहुंच गई, जो एक वर्ष में 100 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी थी। इसके बाद 2012 में ₹922, 2013 में ₹1,021 और 2014 में ₹1,241 तक कीमत दर्ज की गई।
2014 के बाद कीमतों में कुछ राहत भी देखने को मिली। 2015 में सिलेंडर की कीमत घटकर ₹606.50 हो गई और 2016 में ₹584 तक आ गई। हालांकि यह राहत ज्यादा समय तक नहीं रही।
2017 में कीमत फिर बढ़कर ₹747 हो गई और इसके बाद कुछ वर्षों तक कीमतों में हल्का उतार-चढ़ाव बना रहा। 2019 में कीमत ₹706.50 और 2020 में ₹744 दर्ज की गई।
2021 से 2023 के बीच वैश्विक संकट और तेल बाजार में अस्थिरता के कारण गैस की कीमतों में फिर तेजी आई। 2021 में कीमत ₹899.50, 2022 में ₹1,053 और 2023 में ₹1,103 तक पहुंच गई।
हालांकि 2024 में कीमत घटकर ₹803 हो गई, जिससे उपभोक्ताओं को कुछ राहत मिली। लेकिन 2025 में कीमत फिर बढ़कर ₹853 और 2026 में लगभग ₹913 तक पहुंच गई।
आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि एलपीजी की कीमतें केवल घरेलू नीति से नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के दाम, युद्ध और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों से भी प्रभावित होती हैं। यही कारण है कि दुनिया में होने वाले बड़े घटनाक्रमों का असर सीधे आम लोगों की रसोई तक पहुंच जाता है।