
लखनऊ घराने की समृद्ध कथक परंपरा के सुविख्यात कथाकाचार्य पंडित लच्छू महाराज की स्मृति में उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी एवं कथक केंद्र, लखनऊ द्वारा दो दिवसीय पारंपरिक कथक नृत्य कार्यक्रम “नमन – परंपरा कथक की” का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ, जिसमें मुख्य अतिथि प्रो. डॉ. मांडवी सिंह (कुलपति, भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय), प्रो. जयंत खोत (अध्यक्ष, यूपी संगीत नाटक अकादमी), श्रीमती विभा सिंह (उपाध्यक्ष), प्रो. साहित्य कुमार नाहर (पूर्व कुलपति, राजा मानसिंह तोमर संगीत विश्वविद्यालय, ग्वालियर) एवं डॉ. शोभित कुमार नाहर (निदेशक, यूपी संगीत नाटक अकादमी) उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने पंडित लच्छू महाराज की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया।
पहले दिन की प्रस्तुतियां ✨
कथक केंद्र, लखनऊ की रजनी वर्मा के निर्देशन में प्रशिक्षित कलाकारों ने श्री गणेश वंदना से कार्यक्रम का शुभारंभ किया। संगत में कमलाकांत (गायन), पार्थ प्रतिम मुखर्जी एवं शाहनवाज़ खां (तबला), अर्चना (सारंगी), दीपेंद्र कुंवर (बांसुरी) और नवीन मिश्र (सितार) रहे।

इसके बाद नीता जोशी के निर्देशन में कथक केंद्र, लखनऊ के कलाकारों ने प्रस्तुति दी, जिसमें तबले पर राजीव शुक्ला ने संगत की।
पुणे से आयीं साबेरी मिश्रा (जयपुर घराना) ने श्री विष्णु वंदना एवं जयपुर घराने की पारंपरिक कथक प्रस्तुति दी। इनके साथ तबले पर विकास मिश्रा और सितार पर नवीन मिश्र थे।

नोएडा से आए जयकिशन महाराज एवं त्रिभुवन महाराज (लखनऊ घराना) ने पारंपरिक कथक प्रस्तुतियों से सभागार को मंत्रमुग्ध कर दिया। संगत में राहुल विश्वकर्मा (तबला), जयवर्धन दाधीच (गायन) और आरिया खान (सारंगी) थे।
नई दिल्ली से पद्मश्री नलिनी-कमलिनी की युगल जोड़ी ने शिव स्तुति, शुद्ध नृत्य, तीन ताल विलंबित लय और सावन प्रस्तुतियां देकर पूरे वातावरण को भक्तिमय और ऊर्जावान बना दिया। इनके साथ संगत में अकबर लतीफ खान (तबला), नलिनी निगम (गायन), अतुल शंकर (बांसुरी) और अफ़ज़ाल ज़हूर (वॉयलिन) रहे।
दूसरे दिन की झलक
कार्यक्रम का दूसरा दिन (1 सितंबर) और भी खास होगा, जिसमें लखनऊ, बनारस और नई दिल्ली से आए प्रतिष्ठित कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे।