भारतीय ज्ञान परंपरा पर राष्ट्रीय संगोष्ठी, 27-28 फरवरी को महराजगंज में बौद्ध दर्शन पर होगा मंथन


लखनऊ, भारतीय ज्ञान परंपरा, बौद्ध दर्शन और प्राचीन भाषाओं की समृद्ध विरासत को नई पीढ़ी से जोड़ने के उद्देश्य से 27 और 28 फरवरी 2026 को दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है। यह संगोष्ठी अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान, हिन्दुस्तानी एकेडेमी और जवाहर लाल नेहरू स्मारक पी.जी. कॉलेज के हिंदी विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित होगी।
संगोष्ठी का विषय है— “शिक्षा, संस्कृति और संस्कार का प्रसार: भारतीय ज्ञान परंपरा, बौद्ध दर्शन और साहित्य (खास तौर पर संस्कृत और पालि भाषा के संदर्भ में)”। कार्यक्रम का आयोजन महराजगंज स्थित कॉलेज परिसर में किया जाएगा, जिसमें देशभर के विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों से विद्वान, शोधार्थी और छात्र भाग लेंगे।
संगोष्ठी में भारतीय ज्ञान परंपरा की मूल अवधारणाओं, बौद्ध दर्शन की मानवीय दृष्टि तथा संस्कृत और पालि भाषा की बौद्धिक परंपरा पर विस्तार से विचार-विमर्श होगा। वक्ता इस बात पर प्रकाश डालेंगे कि प्राचीन भारतीय शिक्षा व्यवस्था और बौद्ध साहित्य ने समाज को किस प्रकार दिशा दी और वर्तमान समय में उनकी प्रासंगिकता क्या है।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा केवल अतीत का गौरव नहीं, बल्कि भविष्य की राह दिखाने वाली धरोहर है। उन्होंने कहा कि जब युवा अपनी बौद्धिक और सांस्कृतिक विरासत को समझेंगे, तभी वे उसे आगे बढ़ाने में सक्षम होंगे। इस संगोष्ठी के माध्यम से विद्यार्थियों और शोधार्थियों को बौद्ध दर्शन, संस्कृत और पालि जैसी प्राचीन भाषाओं के अध्ययन का अवसर मिलेगा।
गौरतलब है कि अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान की स्थापना वर्ष 1985 में उत्तर प्रदेश शासन के संस्कृति विभाग द्वारा की गई थी। यह एक स्वायत्त संस्था है, जिसका उद्देश्य देश के विभिन्न हिस्सों में प्रचलित बौद्ध परंपराओं का अध्ययन, शोध और बौद्ध स्थलों की सांस्कृतिक विरासत, मानवीय मूल्यों तथा कला से जुड़े अवशेषों का संरक्षण करना है।
दो दिन तक चलने वाली यह संगोष्ठी छात्रों और शोधार्थियों के लिए वैचारिक मंथन का सशक्त मंच साबित होगी, जहां वे विशेषज्ञों के विचार सुनकर अपने ज्ञान और दृष्टिकोण को समृद्ध कर सकेंगे।