लखनऊ। संसद की स्थाई समिति की रिपोर्ट में न्यूनतम पेंशन को अपर्याप्त बताते हुए इसको तत्काल बढ़ाने की सिफारिश की गई है। जिस पर सरकार कोई कार्यवाई नहीं कर रही है, इसके विरोध में गोमती नगर स्थित ईपीएफओ कार्यालय पर ईपीएस 95 राष्ट्रीय संघर्ष समिति द्वारा धरना प्रदर्शन किया गया।
मौके पर मौजूद पेंशनरों ने कहा कि 2013 से अब तक संसद की तीन स्थाई समिति द्वारा न्यूनतम पेंशन बढ़ाने की सिफारिश की जा चुकी है, संसद के प्रत्येक सत्र में विभिन्न पार्टियों के सांसद पेंशन बढ़ोतरी का मुद्दा उठाते हैं 9 से 11 मार्च तक दिल्ली के जंतर मंतर पर प्रदर्शन किया गया पर सरकार ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया।
श्रम मंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन
प्रदर्शन कर रहे पेंशनरों ने बताया कि देश के 81 लाख पेंशनरों को औसतन 1171 मासिक पेंशन दी जा रही है। जबकि समिति पिछले आज 8 वर्षों से न्यूनतम पेंशन 7500 महीना, मंहगाई भत्ता, पति-पत्नी को मुफ्त चिकित्सा की मांग को लेकर आंदोलन कर रही है। पेंशनरों ने धरना स्थल पर क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त अश्विनी कुमार गुप्ता को श्रम मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। इस दौरान धरने में कई विभागों के पेंशनर्स शामिल हुए।
बड़ी संख्या में पेंशनरस हुए शामिल
धरना स्थल पर सभा को राष्ट्रीय सचिव राजीव भटनागर, प्रांतीय महामंत्री राजशेखर नागर एवं आर एन द्विवेदी, प्रांतीय मीडिया प्रभारी सुभाष चौबे, मंडल समन्वयक आर सी मिश्रा, जिला सचिव राम दरश चौधरी, सुदीप जैन, भारत भूषण सिंह, डी के मिश्रा, महिलामोर्चे की प्रांतीय अध्यक्ष गीता वर्मा, संगठन सचिव, सुनीता सोनकर जिलाध्यक्ष सुमन श्रीवास्तव एवं जिला सचिव आशा नारायण आदि ने संबोधित किया।