
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठक में परिवहन निगम से जुड़े तीन महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है। इनमें सार्वजनिक-निजी सहभागिता मॉडल के तहत उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम के 49 बस स्टेशनों के विकास का प्रस्ताव प्रमुख है। इन बस स्टेशनों को DBFOT (डिजाइन, बिल्ड, फाइनेंस, ऑपरेट और ट्रांसफर) मॉडल पर विकसित किया जाएगा, जिससे आधुनिक सुविधाओं के साथ यात्री सेवाओं में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा।
नरौरा, तुलसीपुर और सिकंद्राराऊ में नए बस स्टेशन निर्माण को हरी झंडी
कैबिनेट ने बुलंदशहर के नरौरा, बलरामपुर की तुलसीपुर तहसील और हाथरस के सिकंद्राराऊ में नए बस स्टेशनों के निर्माण के लिए निःशुल्क भूमि उपलब्ध कराने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी है। इन स्थानों पर अलग-अलग विभागों की भूमि परिवहन विभाग को हस्तांतरित की जाएगी, जिससे क्षेत्रीय स्तर पर यातायात व्यवस्था को मजबूत किया जा सके।
दूसरे चरण में 49 बस स्टेशनों का विकास, निवेशकों के लिए शर्तें आसान
परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने बताया कि UPSRTC द्वारा पीपीपी मॉडल पर बस स्टेशनों के विकास के दूसरे चरण में 49 बस स्टेशनों को शामिल किया गया है। इन स्टेशनों पर यात्रियों को शॉपिंग मॉल, सिनेमाघर, फूड कोर्ट जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। निवेशकों को आकर्षित करने के लिए तकनीकी क्षमता की शर्त को 150% से घटाकर 100 प्रतिशत कर दिया गया है, वहीं पात्रता अवधि को 5 वर्ष से बढ़ाकर 8 वर्ष कर दिया गया है। साथ ही सभी प्रस्तावित स्थलों पर 2.5 फ्लोर एरिया रेशियो और ग्राउंड कवरेज की निशुल्क अनुमति दी जाएगी।
स्थानीय विकास और रोजगार सृजन को मिलेगा बढ़ावा
नरौरा में सिंचाई विभाग की 1.12 हेक्टेयर भूमि, तुलसीपुर में लोक निर्माण विभाग की 2 हेक्टेयर भूमि और सिकंद्राराऊ के रतनपुर-हुसैनपुर क्षेत्र में 10.012 हेक्टेयर भूमि परिवहन विभाग को निशुल्क दी जाएगी। इन बस डिपो को आर्थिक केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा, जहां दुकानों और फूड कोर्ट जैसी सुविधाएं होंगी। इससे न केवल यात्रियों को सस्ती, सुरक्षित और सुलभ परिवहन सुविधा मिलेगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे और परिवहन निगम के राजस्व में वृद्धि होगी।
लीज समाप्ति पर भूमि का स्वामित्व परिवहन निगम को होगा हस्तांतरित
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि लीज अवधि समाप्त होने के बाद डेवलपर स्वामित्व वापस नहीं करता है, तो संबंधित भूमि का स्वामित्व स्वतः परिवहन निगम को मिल जाएगा। इससे सरकारी हितों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी।